Delhi Delimitation 2029: दिल्ली में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सीटों का गणित पूरी तरह बदलने वाला है। परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें 7 से बढ़कर 11 हो सकती हैं। खास बात यह है कि इसमें 'महिला आरक्षण' भी लागू होगा।
Lok Sabha Election 2029: दिल्ली में लोकसभा सीटों की संख्या 7 से बढ़कर 11 होने के आसार बढ़ गए हैं। केंद्र सरकार ने कुल संसदीय सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी की जा रही है, जिसके तहत दिल्ली के खाते में भी अतिरिक्त सीटें आएंगी। इस नए समीकरण की सबसे बड़ी बात यह होगी कि विस्तारित 11 सीटों में से करीब 4 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं।
यह प्रक्रिया नए परिसीमन के तहत होगी, जो 2011 की जनगणना के आधार पर 2026-27 में शुरू होने की उम्मीद है। नई सीटें 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू हो जाएंगी। इससे दिल्ली का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत होगी।
परिसीमन के साथ दिल्ली विधानसभा की सीटें भी 70 से बढ़कर करीब 105 हो सकती हैं। यह बदलाव लोकतंत्र को और समावेशी बनाने की दिशा में जरूरी कदम माना जा रहा है, हालांकि दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चिंताएं भी व्यक्त की जा रही हैं। कुल मिलाकर दिल्ली की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार उचित प्रतीत होता है।
वहीं, सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण जल्द से जल्द लागू करने के लिए बड़े कदम उठा रही है। इसके तहत संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल को बुलाया गया है, जिसमें संविधान संशोधन और संबंधित बिल पेश किए जाएंगे।
सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को समय से पहले प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार अब एक मास्टर प्लान पर काम कर रही है। मूल कानून के अनुसार आरक्षण जनगणना और परिसीमन की लंबी प्रक्रिया के बाद ही संभव था, लेकिन अब सरकार तीन नए संशोधन विधेयक लाकर इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से ही जमीन पर उतारने की तैयारी में है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इन बिलों को सदन में पेश करेंगे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सर्वसम्मति से पारित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगा है। सांसदों को पहले ही प्रस्तावित बिल की प्रतियां वितरित की जा चुकी हैं।
आरक्षण को बिना देरी लागू करने के लिए नए परिसीमन की जरूरत है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की चर्चा है, जिसमें लगभग एक-तिहाई (करीब 273) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। दिल्ली जैसी जगहों पर भी लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी संभव है। सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर जल्द परिसीमन कराने पर विचार कर रही है, ताकि 2029 के चुनावों में ही महिलाओं को आरक्षण मिल सके। इससे पहले यह प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद शुरू होती, जो काफी देरी का कारण बन सकती थी।
संसद (लोकसभा) और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित।
आरक्षण घूर्णनशील (रोटेशन) आधार पर होगा।
अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए भी आरक्षण के अंदर महिलाओं का कोटा।
मूल कानून 2023 में सर्वसम्मति से पास हुआ था, लेकिन लागू होने में देरी थी।
विशेष सत्र में इन संशोधनों के पास होने के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की उम्मीद है। यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।