
Delhi Gymkhana Decision on Trees: बढ़ते तापमान और मानसून की बेरुखी के बीच दिल्ली में करीब 500 पेड़ों की कुर्बानी हो सकती है। दरअसल, ये पेड़ दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर में लगे हैं और अगर हाई कोर्ट का फैसला सरकार के पक्ष में आता है, तो यहां की हरियाली पर भी ‘विकास’ की कैंची चल सकती है। केंद्र सरकार सुरक्षा सहित कई कारणों से क्लब खाली करवाना चाहती है। फिलहाल मामला अदालत में है और 28 जुलाई को इस पर अहम सुनवाई होनी है।
इस बीच, एक सर्वे रिपोर्ट सामने आई है, जिससे पता चलता है कि अगर 27 एकड़ में फैले इस क्लब का इस्तेमाल किसी और काम के लिए किया जाता है, तो यहां मौजूद हरियाली पर क्या असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, क्लब परिसर में 51 प्रजातियों के कम से कम 486 बड़े पेड़ हैं, जिनमें से कई तो दशक पुराने हैं।
दिल्ली जिमखाना क्लब 1913 से सफदरजंग रोड पर स्थित है। इसी साल 22 मई को आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय ने क्लब को वापस सरकारी कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की, जिसे लेकर काफी बवाल हुआ और मामला हाई कोर्ट पहुंच गया। सरकार का कहना है कि यह ज़मीन डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत एवं सुरक्षित करने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अन्य जरूरी कामों के लिए बहुत ज़रूरी है।
जिमखाना परिसर में मौजूद पेड़-पौधों का सर्वे नेचुरलिस्ट विजय धस्माना और एनवायरनमेंटलिस्ट डॉ. रोली शुकुल थापर की अगुवाई में किया गया। उन्होंने परिसर में लगे ऐसे बड़े पेड़ों का रिकॉर्ड तैयार किया जिनका घेरा 100 सेंटीमीटर से अधिक है। सर्वे टीम ने पेड़ों की डिजिटल लिस्ट बनाने के लिए GPS-आधारित मैपिंग का इस्तेमाल किया है। इस सर्वे में लगभग 100 छोटे पेड़ों के साथ ही झाड़ियां एवं अन्य वनस्पतियों को शामिल नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि परिसर का कुल हरियाली कवर सर्वे में दर्ज संख्या से कहीं अधिक होगा।
सर्वे रिपोर्ट कहती है कि बड़े और पुराने पेड़ काफी अधिक कार्बन जमा करते हैं, इनसे आसपास का इलाका भी अपेक्षाकृत ठंडा राहत है। ये पेड़ पक्षियों और चमगादड़ों के साथ-साथ कीड़ों को भी आश्रय देते हैं और बारिश के पानी को रोकते हैं। ऐसे में अगर ये पेड़ काटे जाते हैं, तो इकोसिस्टम गड़बड़ा सकता है। इन पेड़ों से मिलने वाले फायदे दशकों तक दोबारा हासिल नहीं किए जा सकेंगे।
माना जाता है कि यहां के कई पेड़ आयुर्वेदिक गुण वाली प्रजाति के हैं। जिमखाना परिसर में यह प्रजाति सबसे अधिक संख्या में पाई गई है, इसके कुल 84 बड़े पेड़ यहां हैं। इसके बाद नीम (63), रॉयल पाम (44), आम (35), करंज (28), शहतूत (23) और पीपल (22) का नंबर आता है। इसके अलावा, क्लब परिसर में 15 जामुन के पेड़, 13 विलायती कीकर, 12 फॉक्सटेल पाम और 10 फिशटेल पाम भी शामिल हैं। अगर सरकार जिमखाना को वापस अपने कब्जे में लेती है, तो इन पेड़ों के भविष्य पर संकट आ सकता है। क्योंकि सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अन्य जरूरी कामों के लिए यह जमीन बहुत ज़रूरी है। ऐसे में जाहिर है, यहां दूसरा निर्माण होगा और इसके लिए पेड़ काटने ही पड़ेंगे।
केंद्र सरकार के खिलाफ इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 8 जून को पूछा था कि सरकार को यह जमीन क्यों चाहिए? क्या यहां 20 मंजिला इमारतें बनाई जाएंगी? इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि आप उन सभी हेरिटेज स्ट्रक्चर का क्या करेंगे, जो जिमखाना में भी मौजूद हैं?
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर लुटियंस दिल्ली की हरियाली वाली जगह पर कंक्रीट की इमारतें बना दी गईं, तो राजधानी का दम घुटने लगेगा।