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‘PM नरेंद्र मोदी सोनम वांगचुक के क्रांतिकारी कदमों से डरे हैं’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर बोले अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal Sonam Wangchuk Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज नहीं सुनी गई तो 2029 में सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़े
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Sonam Wangchuk Hunger Strike

जंतर-मंतर से अरविंद केजरवाल का बयान

Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधार और परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के समर्थन में पहुंचे केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।

केजरीवाल ने कहा कि NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लगातार लीक हो रहे हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि NEET पेपर लीक के बाद 20 छात्रों ने आत्महत्या कर ली, लेकिन सरकार यह भरोसा तक नहीं दिला सकी कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री से शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा नहीं होगा, क्योंकि प्रधानमंत्री को डर है कि वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में "क्रांतिकारी बदलाव" कर सकते हैं।

'2029 में सत्ता से बाहर हो जाएगी सरकार'

अरविंद केजरीवाल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर युवाओं की आवाज को अनसुना किया गया तो 2029 के लोकसभा चुनाव में यही युवा सरकार को सत्ता से बाहर कर देंगे। उन्होंने 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जंतर-मंतर से उठी आवाज ने तीन साल बाद तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था और इतिहास खुद को दोहरा सकता है।

सोनम वांगचुक की सेहत पर हाईकोर्ट की चिंता

इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई है। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना चिकित्सकीय निगरानी की जाए और सरकारी डॉक्टरों की सलाह के अनुसार जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जाए। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि हर नागरिक का जीवन अमूल्य है और उसकी सुरक्षा के लिए सरकार को हरसंभव प्रयास करने चाहिए।