Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को रेप और ब्लैकमेलिंग से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को बेल दे दी। साथ ही टिप्पणी भी की कि किसी व्यक्ति की नैतिकता और अपराध को अलग-अलग नजरिये से देखना जरूरी है।
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के एक मामले में आरोपी जिम ट्रेनर को राहत देते हुए उसे जमानत दे दी है। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गिरीश कठपालिया की बेंच ने एक बड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की नैतिकता निजी आचरण और उसके किए गए कथित अपराध को अलग-अलग नजरिए से देखना चाहिए, विशेषकर तब जब किसी की निजी आजादी का सवाल हो।
अदालत ने पाया कि आरोपी और शिकायतकर्ता महिला (जो पेशे से वकील हैं) के बीच संबंध आपसी सहमति से थे। जस्टिस कठपालिया ने कहा कि कोर्ट में जो फोटो और वीडियो पेश किए गए, उनसे पहली नजर में यही लगता है कि दोनों के बीच रिश्ता मर्जी से था। बार एंड बेंच में छपी रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी का शादीशुदा होना, बच्चा होना या अलग धर्म का होना उसे जमानत देने से इनकार करने का कारण नहीं बन सकता।
पुलिस के अनुसार, महिला और जिम ट्रेनर की मुलाकात दिल्ली के एक जिम में हुई थी, जहां से उनकी दोस्ती शुरू हुई। महिला का आरोप था कि आरोपी ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर बेहोश किया और गाजियाबाद के एक होटल में ले जाकर उसके साथ गलत काम किया। महिला ने यह भी कहा कि आरोपी ने उसकी कुछ फोटो खींच ली थीं और उन्हें सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करता रहा। शिकायत में 65 हजार रुपये वसूलने की बात भी कही गई थी।
वहीं आरोपी की ओर से अदालत में कहा गया कि महिला के साथ उसका रिश्ता पूरी तरह सहमति से था और जब दोनों के संबंध खराब हुए, तब यह शिकायत दर्ज कराई गई। आरोपी ने कोर्ट के सामने कुछ फोटो और वीडियो क्लिप भी पेश किए, जिनमें दोनों को करीबी रिश्ते में दिखाया गया।
हाई कोर्ट ने मामले की गहराई से जांच करने के बाद कहा कि शिकायत करने वाली महिला एक वयस्क और समझदार वकील हैं। जांच के दौरान आरोपी के फोन से कोई ऐसी आपत्तिजनक फोटो या वीडियो नहीं मिली, जिससे ब्लैकमेलिंग की बात साबित हो। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी के पास मौजूद साक्ष्य उसके दावे को मजबूत करते हैं कि रिश्ता आपसी मर्जी से था। इन्ही सब बातों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को बेल दे दी।