नई दिल्ली

अपने भाई को कैसे दिए 82000? निगरानी के लिए पत्नी का जॉइंट अकाउंट खुलवाने HC पहुंचा पति, जज ने दिया दो टूक जवाब

Delhi HC News: पति ने हाईकोर्ट में पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं देने के लिए याचिका दायर की। उसने गुजारा भत्ता नहीं देने का कारण यह बताया कि उसने अपेन भाई को 82 हजार रुपये दिए थे।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने पति को अपनी जिम्मेदारी से भागने के लिए लगाई फटकार

Delhi HC News: दिल्ली हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें पति ने अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं देने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की। पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी ने अपने भाई को 82000 रुपये ट्रांसफर किए थे, जिससे यह साबित हो जाता है कि उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं और उसे गुजारा भत्ता देने की जरूरत नहीं है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पति को फटकार लगाई और कहा कि ऐसे दावों से वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि अगर पत्नी के बैंक में थोड़ी सी बचत है, तो भी पति गुजारा भत्ता देने से मना नहीं कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि मात्र महिला के बैंक में पैसे हैं या उसने अपने भाई को कभी पैसे ट्रांसफर किए, उसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उनके पास रेगुलर इनकम का कोई सोर्स है और वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में महिला की पूरी स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।

2018 में किए थे भाई को पैसे ट्रांसफर

पति अपनी याचिका में जिस ट्रांजेक्शन की बात कर रहा था, वह 2018 में किया हुआ एक ट्रांजैक्शन था, जिसमें पत्नी ने अपने भाई को 82 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। कोर्ट ने माना कि साल 2018 में किए गए मात्र एक ट्रांजैक्शन से यह नहीं माना जा सकता कि पत्नी की कोई पक्की और स्थायी इनकम है। सिर्फ इस आधार पर यह मान लेना कि पत्नी अपना और अपनी बेटी का ध्यान रख लेगी, यह मानना बिल्कुल गलत होगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अकसर विवाह में विवाद के बाद महिला अपने मायके से आर्थिक मदद लेती है, लेकिन उसे भी महिला की कमाई नहीं माना जा सकता है और न ही पति को गुजारा भत्ता देने से छूट दी जा सकती है।

अब शुरुआत से जानिए पूरा मामला

इस दंपति की शादी 2001 में 25 साल पहले हुई थी, लेकिन 2015 में दोनों अलग-अलग हो गए थे। पति ने पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की याचिका दायर की। उसके बाद पत्नी ने खुद के और अपनी बेटी के लिए गुजारा भत्ते की मांग के लिए फैमिली कोर्ट के दरवाजे खटखटाए। फैमिली कोर्ट ने इस मामले में पति को उसकी पत्नी और उसकी बेटी के लिए हर महीने 25 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। फैमिली कोर्ट के इसी निर्देश को लेकर पति ने अब हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

याचिका में क्या लिखा?

पति ने कोर्ट में दलील पेश की कि फैमिली कोर्ट ने पत्नी की आय से जुड़े दस्तावेजों को ठीक से देखे बिना ही 25000 गुजारा भत्ता देने के आदेश दे दिए। पत्नी और उसके भाई के बीच के ट्रांजैक्शन का हवाला देते हुए उसने कहा कि उसके पास पर्याप्त इनतम है और पिछले तीन सालों में उसकी पत्नी की आय हर महीने 15 हजार तक पहुंच गई है, जबकि वही रकम वह पहले उसे गुजारे भत्ते के रूप में दे रहा था। पति का कहना था कि जब वह इतना सक्षम है तो उस पर बिना वजह बोझ डालना गलत है। इसके अलावा उसने यह भी कहा कि उसे पता वहीं चल पाता है कि उसके दिए हुए पैसे बेटी के भपर खर्च हो रहे हैं या नहीं। इसी वजह से उसने एक जॉइंट अकांउट खोलने की भी मांग रखी। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी सभी दलीलों को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट के निर्देश को बरकरार रखा।

Updated on:
02 Jan 2026 06:24 pm
Published on:
02 Jan 2026 06:24 pm
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