
शिमला के एएसपी अभिषेक और दिल्ली के एसीपी राहुल काली स्वेटर में
shimla police vs delhi police: समय था रात के 10 बजे और कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर एक-एक करके गाड़ियों की रफ्तार थमती जा रही थी। शिमला से 20 किमी दूरी पर शोघी बैरियर्स पर एकदम से अफरातफरी मच गई। कभी सुना है पुलिस ने ही पुलिस की गाड़ियों को रोक कर तलाशी ली हो? हां, यही कारण था जिसके चलते नेशनल हाईवे पर अफरातफरी मच गई। शिमला पुलिस की टीम ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के एसीपी रोहित की अगुवाई में जा रही टीम को रोका और हिरासत में ले लिया।
दरअसल, भारत मंडपम में एआई समिट में प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के तीन आरोपियों को दिल्ली और हरियाणा पुलिस की टीम लेकर जा रही थी। इस दौरान शिमला पुलिस ने इस गिरफ्तारी को अवैध बताया और कहा कि स्थानीय पुलिस को जानकारी नहीं दी गई। दिल्ली पुलिस के एसीपी रोहित ने शिमला के एएसपी रोहित ने कहा कि उन्होंने सुबह पांच बजे आरोपियों को अरेस्ट किया था और वह कोर्ट में समय पर आरोपियों को पेश नहीं कर पाएंगे। एएसपी शिमला अभिषेक ने एसीपी से पूछा कि क्या आपने लोकल थाने में सूचना दी थी? आपने गिरफ्तारी के कोई कागज नहीं दिखाए।
बुधवार तड़के करीब 5 बजे शिमला से 120 किलोमीटर दूर रोहड़ू का शांत इलाका उस वक्त थर्रा उठा, जब दिल्ली पुलिस की टीम 5 गाड़ियों के भारी-भरकम काफिले के साथ चिड़गांव के मांदली स्थित एक रिसॉर्ट में छापेमारी करने पहुंची। पुलिस ने रिसॉर्ट को चारों तरफ से घेरकर वहां ठहरे 3 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। करीब सवा घंटे की सघन पूछताछ के बाद, सुबह 6:15 बजे तीनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर रिसॉर्ट का डीवीआर CCTV फुटेज, आरोपियों का निजी सामान और मौके पर मौजूद एक थार गाड़ी को भी अपने कब्जे में ले लिया है। अचानक हुई इस छापेमारी और गिरफ्तारी से इलाके में हड़कंप मच गया है।
गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही हिमाचल पुलिस अलर्ट मोड में आई और तुरंत कार्रवाई शुरू की, और शिमला पुलिस ने 3 अलग-अलग जगह नाकेबंदी की, और सुबह करीब 10.30 बजे ISBT शिमला पर दिल्ली पुलिस की एक गाड़ी रोकी गई। शोघी में दूसरी गाड़ी रोकी गई और सोलन के धर्मपुर में बाकी 2 गाड़ियों को रोक लिया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस को शिमला पुलिस ने करीब 3 घंटे रोकने के बाद शिमला पुलिस दिल्ली पुलिस को लेकर शिमला की जिला कोर्ट में पहुंची, जहां शिमला पुलिस ने अपनी एप्लिकेशन दाखिल की जबकि दिल्ली पुलिस को एप्लिकेशन दाखिल नही करने दिया। कोर्ट ने शिमला पुलिस की याचिका पर सुनवाई नहीं की और दोबारा 24 घंटे में आने के लिए कहा था।
साढ़े सात बजे दिल्ली पुलिस की टीम कोर्ट से निकली और तो फिर बाद में दिल्ली पुलिस को शोघी के पास रोका गया। फिर रात करीब 11:30 बजे शिमला के डीडीयू अस्पताल में आरोपियों का मेडिकल हुआ। देर रात जज के निवास पर दिल्ली पुलिस और आरोपियों को पेश किया गया, जंहा करीब 1:30 बजे तीनों आरोपियों का ट्रांजिट रिमांड दिल्ली पुलिस को मिला। फिर दोबारा दिल्ली पुलिस को शोघी में शिमला पुलिस ने रोका, और सुबह 6 बजे दिल्ली पुलिस टीम आरोपियों को लेकर आगे रवाना हुई।
शिमला पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने जब दिल्ली पुलिस के एसीपी से उनके दस्तावेज और पहचान पत्र दिखाने को कहा, तो उन्होंने जवाब दिया कि वह कागज तो दिखा देंगे, लेकिन सुबह से ही उनकी कार्रवाई में बाधा डाली जा रही है। उन्होंने साफ किया कि वह यहीं खड़े हैं और उनके पास अरेस्ट मेमो और सीजर मेमो मौजूद हैं। एसीपी ने यह भी बताया कि उन्होंने सुबह 8 बजकर 11 मिनट पर केस दर्ज कर लिया था और शिमला पुलिस पर मामले को उलझाने का आरोप लगाया। वहीं, शिमला के एएसपी अभिषेक ने दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि उन्होंने अब तक आरोपियों का ट्रांजिट रिमांड क्यों नहीं लिया। आखिरकार दिल्ली पुलिस को झुकना पड़ा और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर भेजा गया।
हाईवे पर पुलिस ने एक तरफ का पूरा ट्रैफिक रोक दिया था, जिसके चलते शोघी में लंबा जाम लग गया। इस स्थिति को देख एक आम नागरिक भड़क गया और दिल्ली पुलिस के एसीपी पर बरस पड़ा। उस व्यक्ति ने दो टूक शब्दों में कहा, आप चिल्लाओ मत, कागज दिखाओ… आपकी वजह से आम जनता को परेशान होना पड़ रहा है। इस पर एसीपी ने सफाई दी कि उनकी गाड़ियां साइड में खड़ी हैं, फिर भी यह बहस करीब डेढ़ घंटे तक चलती रही। इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम को शोघी पोस्ट ले जाया गया, जहां उन्हें चाय-पानी और स्नैक्स दिएगए। दिल्ली पुलिस ने शिमला के डीडीयू DDU अस्पताल में आरोपियों का मेडिकल करवाया और उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया।
उधर, शिमला के चिड़गांव में दिल्ली पुलिस ने ट्रेसपासिंग और किडनैपिंग की धारा में केस दर्ज किए हैं। होटल मालिक की शिकायत पर यूथ कांग्रेस के वर्करों पर किडनैपिंग का आरोप लगाया गया है। गौतलब है कि तीनों आरोपी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वहीं, शिमला में मेडिकल करवाने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने अंबाला के सिविल अस्पताल में दोबारा आरोपियों का मेडिकल करवाया और फिर आगे दिल्ली ले गए।
इधर, पूरे विवाद को लेकर सीएम सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि होटल के किचन के दिल्ली पुलिस के जवान जवानरिजॉर्ट में घुसे थे। उन्होंने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी में कोई भी प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया गया। कोई वारंट नहीं था। लोकल पुलिस को सूचना नहीं दी गई है। दिल्ली पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड भी नहीं लिया। दिल्ली पुलिस को क्या नियमों का पता नहीं था और इसलिए हिमाचल प्रदेश की पुलिस को रोका गया। मामले को लेकर राजनीति के सवाल पर नरेश चौहान ने कहा कि इसमें शंका नहीं है। पहले दिन से मामले में राजनीति हो रही है।
Published on:
26 Feb 2026 01:36 pm
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