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11 साल की बच्ची से हैवानियत करने वाले को 5 साल की जेल, CCTV की मदद से सामने आया सच

Delhi Court Verdict: दिल्ली की एक अदालत ने 11 साल की मासूम से यौन उत्पीड़न के दोषी को 5 साल की कड़ी सजा सुनाई है। आरोपी ने कोर्ट में बच्ची की मदद करने का झूठा बहाना बनाया था, जिसे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर खारिज कर दिया गया।

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Delhi Court Verdict: देश की राजधानी में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाते हुए तीस हजारी कोर्ट ने एक जरूरी फैसला सुनाया है। अदालत ने 11 साल की बच्ची के साथ यौन प्रताड़ना करने वाले धर्मेंद्र नामक व्यक्ति को 5 साल के कठोर कारावास की सजा दी है। सुनवाई के दौरान आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया था कि वह बच्ची को गिरने से बचा रहा था, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों ने उसकी इस दलील को पूरी तरह झुठला दिया। अदालत ने समाज के हालातों पर दुख जताते हुए कहा कि हम अपनी अगली पीढ़ी को सुरक्षित माहौल देने में नाकाम हो रहे हैं।

CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा गवाह

मामला 3 अप्रैल 2026 की रात दिल्ली के निहाल विहार इलाके का है, जब बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। आरोपी ने मौका पाकर बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की, लेकिन बच्ची के शोर मचाने पर वह भाग निकला। आरोपी के वकील ने दलील दी कि बारिश की वजह से जमीन गीली थी और वह बच्ची को फिसलने से बचा रहा था। हालांकि, कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज देखकर साफ कहा कि बच्ची कहीं से भी फिसल नहीं रही थी और आरोपी की हरकतें पूरी तरह यौन प्रताड़ना के इरादे से की गई थीं।

'हम एक समाज के रूप में फेल'

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया ने फैसला सुनाते हुए बेहद मार्मिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी में पहले बच्चे हंसते-खेलते दिखते हैं, लेकिन अगले ही पल आरोपी की हरकत उस खुशी को दर्द में बदल देती है। कोर्ट ने कहा कि आज बच्चे अपने घर के बाहर भी सुरक्षित नहीं हैं, जो यह दिखाता है कि हमारा समाज बच्चों की गरिमा की रक्षा करने में विफल हो रहा है।

महज 14 दिनों में आया फैसला

अदालत ने त्वरित न्याय की मिसाल पेश करते हुए चार्जशीट दाखिल होने के मात्र 14 दिनों के भीतर यह फैसला सुनाया। दोषी धर्मेंद्र को पॉक्सो POCSO एक्ट और बीएनएस BNS की धाराओं के तहत 5 साल की जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। साथ ही, पीड़ित बच्ची को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।

परिवार का हवाला देकर राहत की मांग खारिज

दोषी ने सजा कम कराने के लिए अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी का वास्ता दिया था। लेकिन अदालत ने इसे ठुकराते हुए कहा कि अपराध करते समय उसे अपने परिवार का ख्याल आना चाहिए था। दोषी और पीड़ित बच्ची की उम्र में 14 साल का अंतर होने के कारण कोर्ट ने इस अपराध को और भी गंभीर माना।