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Free Epilepsy Test AIIMS: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान AIIMS ने मिर्गी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई पहल शुरू की है। अब एम्स के न्यूरोसाइंसेज सेंटर में मिर्गी के इलाज के लिए होने वाली महंगी जांचें पूरी तरह निशुल्क की जाएंगी। इस सुविधा के शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राहत मिलने के साथ ही डॉक्टरों के लिए भी यह तय करना आसान होगा कि किस मरीज को कितनी दवा की जरूरत है। यह कदम अनुमान आधारित इलाज को खत्म कर सटीक और व्यक्तिगत चिकित्सा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
निजी लेबोरेटरी में मिर्गी से जुड़ी जांचों की कीमत 6,000 से 10,000 रुपये के बीच होती है। लगातार इतनी महंगी जांच कराना कई मरीजों के लिए संभव नहीं होता। एम्स ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त है, हालांकि भविष्य में सरकारी नीति के अनुसार इसे बहुत ही कम और रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जा सकता है। मरीज अपनी जांच रिपोर्ट अस्पताल के इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल या रोगी सेवा पोर्टल से ऑनलाइन ले सकेंगे।
एम्स के न्यूरोसाइंसेज सेंटर के प्रमुख डॉ. एसबी गायकवाड़ के अनुसार, अब डॉक्टर मरीज के खून की जांच करके यह पता लगाएंगे कि उसके शरीर में दवा की कितनी मात्रा मौजूद है। इसे 'थैरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग' कहा जाता है। हर मरीज के शरीर की बनावट अलग होती है, इसलिए सबको एक जैसी दवा की खुराक नहीं दी जाएगी। दवा की सही मात्रा तय होने से शरीर पर होने वाले साइड इफेक्ट्स कम होंगे और इलाज ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकेगा।
न्यूरोबायोकेमिस्ट्री लैब के प्रभारी डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि इस जांच के लिए मरीज के खून का मात्र 1 से 3 मिलीलीटर नमूना लिया जाएगा। यह सुविधा ओपीडी और आईपीडी दोनों तरह के मरीजों के लिए उपलब्ध है। डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी करेगी और जरूरत पड़ने पर समय-समय पर उनकी दवा की मात्रा में बदलाव भी किए जाएंगे।
डॉक्टरों के अनुसार, भारत में करीब डेढ़ करोड़ लोग मिर्गी से प्रभावित हैं और हर साल 2 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं। एम्स की इस नई व्यवस्था से लाखों मरीजों को बेहतर इलाज मिलने के साथ ही दवा के जोखिम से भी सुरक्षा मिलेगी।
Updated on:
10 May 2026 07:15 pm
Published on:
10 May 2026 07:15 pm
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