नई दिल्ली

बिना प्रमाण के खोखला दावा करना ठीक नहीं…पत्नी के पक्ष में खड़ा हुआ दिल्ली हाईकोर्ट, पति हैरान

Delhi High Court Decision: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी की बात को सही मानते हुए पति के खिलाफ फैसला सुनाया। इस दौरान न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि बिना प्रमाण के कोर्ट में खोखले दावे नहीं करने चाहिए।
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Delhi High Court Decision in husband-wife dispute
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला।

Delhi High Court Decision: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि बिना सबूत और ठोस प्रमाण में कोर्ट में खोखला दावा नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने पत्नी के हक में फैसला सुनाते हुए पति को कड़ी फटकार भी लगाई। यह मामला पति-पत्नी के बीच शादी के सालभर बाद ही उपजे विवाद के बाद अलगाव और गुजारा भत्ता से जुड़ा है। पति ने कोर्ट में कहा था कि पत्नी एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाकर अच्छा कमाती है। जबकि वह एक एनजीओ में स्पेशल एजुकेटर और मात्र 10 रुपये वेतन पाता है। इसलिए गुजारा भत्ता में उसे राहत दी जाए।

पहले विस्तार से समझिए पूरा मामला

दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश से जुड़ा है, जहां जून 2021 में दिल्ली निवासी एक युवती का मुस्लिम रीति रिवाज से यूपी निवासी लड़के से निकाह हुआ था। शादी के सालभर बाद ही यानी साल 2022 में पति-पत्नी के बीच विवाद हो गया। यह विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने अलग होने का फैसला ले लिया। इसी बीच पति ने एक दिन गुस्से में अपनी पत्नी को तीन तलाक दे दिया। इसके बाद पत्नी गुजारा भत्ता के लिए कोर्ट पहुंची थी, जहां पति ने दलील दी कि पत्नी नर्सरी टीचर है और अच्छी सैलरी पाती है, जबकि वह एक एनजीओ में स्पेशल एजुकेटर है और मात्र 10 हजार उसका वेतन है।

पत्नी ने कोर्ट को क्या बताया?

कोर्ट में याचिका लगाकर पत्नी ने बताया कि उसका पति ग्रेजुएट है और निजी स्कूल में शिक्षक है। पत्नी ने कोर्ट को दिए हलफनामे में बताया कि उसके पति की सैलरी 25 हजार रुपये है। इसके अलावा वह ट्यूशन पढ़ाकर भी करीब 15 हजार रुपये कमाता है और घर के किराए-दुकान से भी उसकी आमदनी करीब 30 हजार रुपये महीना है। ऐसे में उसे गुजारा भत्ता लेने का पूरा हक है। निचली अदालत ने पति को 2500 रुपये महीना पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। इसके बाद पति ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका देकर इस फैसले को चुनौती दी।

पति ने दिल्ली हाईकोर्ट ने दीं ये दलीलें

पति ने दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका दायर कर दलील दी कि उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी है। वह एक नर्सरी शिक्षिका है और अच्छी सैलरी लेती है। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिलेखों की जांच-पड़ताल के दौरान पाया कि पत्नी मात्र 11वीं पास है। इसके अलावा पत्नी ने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का भी आरोप लगाया था, जो सच पाए गए। हलफनामे में पत्नी ने बताया कि उसकी कमाई का फिलहाल कोई जरिया नहीं है। ऐसे में कोर्ट ने पति को अपनी दलीलें साबित करने के लिए कहा तो पति पत्नी की आय का कोई साक्ष्य नहीं दे पाया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत कर रही थी। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पाया कि पति पत्नी की कमाई का कोई भी ठोस सबूत उपलब्ध कराने में असमर्थ रहा है। ऐसे में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा "अंतरिम भत्ता तय करते समय पत्नी को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि वह खुद कमाती है या फिर खुद को संभाल सकती है। बिना ठोस सबूत पति का कोई भी दावा करना काफी नहीं है। पत्नी सिर्फ 11वीं तक पढ़ी है। ऐसे में किसी स्कूल में बतौर शिक्षिका जॉब की बात मानने वाली नहीं है।"

फैमिली कोर्ट का फैसला पलटकर गुजारा भत्ता बढ़ाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने पत्नी के लिए 2500 रुपये गुजारा भत्ता की राशि तय की थी, जो फिलहाल कम है। ऐसे में कोर्ट ने गुजारा भत्ता की राशि 1000 रुपये बढ़ाते हुए 3500 कर दी। कोर्ट ने कहा कि पति का यह दावा भी अवैध है कि उसकी सैलरी मात्र 10000 रुपये है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में ग्रेजुएट/स्किल्ड वर्कर के लिए लागू न्यूनतम मजदूरी ही 13500 रुपये है। ऐसे में उसी कमाई का आकलन करते हुए कोर्ट ने पत्नी का अंतरिम भत्ता बढ़ा दिया। कोर्ट ने कहा "इस मामले में पत्नी के पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है। दोनों पक्षों की स्थिति और पति की आंकी गई कमाई के हिसाब से फैमिली कोर्ट द्वारा तय किया गया पुराना भत्ता कम था।" कोर्ट ने आदेश दिया कि पत्नी को बढ़े हुए गुजारा भत्ता की राशि पति को तीन महीने में चुकानी होगी।

Updated on:
08 Jan 2026 06:53 pm
Published on:
08 Jan 2026 06:53 pm
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