
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक कारोबारी राघव कपूर को फिलहाल राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी है। राघव कपूर पर अपनी पूर्व लिव-इन पार्टनर के घर में घुसने, चोरी करने और उन्हें चोट पहुंचाने के आरोप हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक अंतरिम सुरक्षा दी है, लेकिन साथ ही जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है।
जस्टिस तेजस करिया की बेंच राघव कपूर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, बशर्ते वह जांच अधिकारी के बुलाने पर जांच में शामिल हों और पूरा सहयोग करें। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मामले में नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें आवेदक, उसकी मां, शिकायतकर्ता और शिकायतकर्ता की मां के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की जानकारी शामिल होगी। साथ ही घटना से जुड़े CCTV फुटेज की भी जांच की जाएगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता और राघव कपूर की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और कॉल रिकॉर्ड की जांच जरूरी है, ताकि घटना की सही तस्वीर सामने आ सके।
हाई कोर्ट ने कहा कि राघव कपूर को जांच अधिकारी के बताए समय पर जांच में शामिल होना होगा। उन्हें अपने और अपनी मां के मोबाइल फोन समेत मांगी गई सभी जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी।
राघव कपूर की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील अमित चड्ढा ने कहा कि FIR में लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने बताया कि राघव और शिकायतकर्ता लंबे समय तक आपसी सहमति से रिश्ते में थे और दुबई में लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रहते थे। बाद में दोनों भारत लौटे और मिलकर एक कारोबार भी शुरू किया। वकील ने कोर्ट में दोनों के पुराने रिश्ते को साबित करने के लिए तस्वीरें भी पेश कीं। उनका कहना था कि कुछ गलतफहमियों के चलते दोनों ने एक-दूसरे से बातचीत बंद कर दी थी और फोन नंबर भी ब्लॉक कर दिए थे।
बचाव पक्ष के मुताबिक, 21 अप्रैल 2026 की रात शिकायतकर्ता की मां ने राघव कपूर की मां को फोन कर दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने के लिए राघव को घर बुलाया था। इसके बाद राघव शिकायतकर्ता के घर पहुंचे थे और उसी दौरान कथित घटना हुई। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश लोक अभियोजक (APP) ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। पुलिस का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी का व्यवहार शिकायतकर्ता और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित तौर पर चोरी हुए गहने अभी तक बरामद नहीं हुए हैं। इसी वजह से पुलिस का कहना है कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।