
Sanitary pad vending machines: दिल्ली के पुलिस थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए पीरियड्स से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। एक जनहित याचिका के जरिए मांग की गई है कि सभी थानों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाई जाएं और महिला पुलिसकर्मियों के लिए एक ठोस मासिक धर्म स्वच्छता नीति बनाई जाए।
आपको बता दें कि जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन नाम की संस्था ने कोर्ट में यह याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि हजारों महिला पुलिसकर्मी दिन-रात 12-12 घंटे की कठिन ड्यूटी करती हैं और रात में गश्त पर भी रहती हैं। इसके बावजूद, राजधानी के ज्यादातर पुलिस थानों में उनके लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन जैसी बेहद जरूरी सुविधा तक मौजूद नहीं है।
याचिका में साल 2024-25 के RTI से मिले जवाबों का हवाला दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, नई दिल्ली जिले को छोड़कर दिल्ली के ज्यादातर पुलिस थानों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें हैं ही नहीं। चौंकाने वाली बात यह है कि दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने इस जरूरी सुविधा के लिए न तो कोई अलग बजट रखा है और न ही कोई ऑफिशियल गाइडलाइंस जारी की हैं।
संस्था की तरफ से वकील कर्णिका बहुगुणा और पूजा कुशवाहा ने कोर्ट में कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान और समानता का मुद्दा है। बुनियादी सुविधाएं न देना उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में यह भी कहा गया कि आज जब एयरपोर्ट, स्कूलों और मॉल जैसी जगहों पर ये मशीनें मिल सकती हैं, तो थानों में क्यों नहीं, जहां महिलाएं इतनी कठिन परिस्थितियों में काम करती हैं?
इस याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में जल्द ही सुनवाई हो सकती है। कानून के जानकारों का मानना है कि अगर कोर्ट इस मामले में कड़ा रुख अपनाता है, तो दिल्ली पुलिस को जल्द से जल्द अपने सभी थानों में महिला कर्मियों के लिए बेहतर माहौल और जरूरी सुविधाएं मुहैया करानी होंगी।