Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के प्राइवेट स्कूलों के पक्ष में एक जरूरी फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली सरकार के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटियों SLFRC का गठन किया जाना था। साथ ही, अगले तीन शैक्षणिक सत्रों के लिए प्रस्तावित फीस का विवरण देने की अनिवार्यता पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है।
Delhi High Court: दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को बड़ी राहत देते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों के हक में फैसला सुनाते हुए सरकार के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है, जिसमें स्कूल-लेवल फीस रेगुलेशन कमेटियों SLFRCs के गठन और भविष्य के तीन सत्रों की फीस का ब्यौरा मांगा गया था। शनिवार को अपना फैसला सुनाते हुए, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने साफ किया कि स्कूल फिलहाल पिछले साल के स्तर पर ही फीस लेना जारी रख सकते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि 1 फरवरी का नोटिफिकेशन मामले की आखिरी सुनवाई तक लागू रहेगा।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब तक मुख्य याचिका पेंडिंग है, तब तक फीस रेगुलेशन कमेटियों SLFRC के गठन को टाला जाना चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि सत्र 2026-2027 में स्कूल पिछले एकेडमिक सेशन की दर से ही फीस वसूल सकेंगे। दरअसल, प्राइवेट स्कूलों ने उस सरकारी आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें बेहद कम समय 10 से 14 दिन के भीतर कमेटी बनाने और भविष्य के तीन सालों की फीस की जानकारी देने की अनिवार्य शर्त रखी गई थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
प्राइवेट स्कूलों ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह सरकारी आदेश उनकी समस्याओं को कम करने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन समय सीमा को लेकर इसमें विरोधाभास है। एक्ट के अनुसार कमेटी बनाने की समय सीमा 15 जुलाई है, जबकि नोटिफिकेशन में इसे 10 फरवरी तक पूरा करने का निर्देश दिया गया। इसके जवाब में दिल्ली सरकार ने दलील दी कि नोटिफिकेशन का असल मकसद स्कूलों में मुनाफाखोरी और शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकना है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि इस आदेश के लागू होने से स्कूलों को ऐसा कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा जिसे बाद में सुधारा न जा सके।