Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने झूठे दुष्कर्म आरोपों पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी को जीवनभर के लिए मानसिक, सामाजिक और कानूनी घाव मिलते हैं, जिनके असर दोनों पक्षों पर दूरगामी होते हैं।
Delhi High Court: झूठा दुष्कर्म का आरोप लगाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। दरअसल, एक केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि झूठे आरोपों में किसी व्यक्ति को फंसाए जाने से आरोपी को ऐसे घाव मिलते हैं जो जिंदगी भर नहीं मिट सकते और कथित पीड़िता एवं आरोपी दोनों के लिए इसके दूरगामी परिणाम होते हैं।
आपको बता दें कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा दिल्ली पुलिस द्वारा निचली न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर एक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई कर रही थीं। पीड़िता के अपने पूर्व बयानों से पलट जाने के बाद निचली अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इस मामले में 15 दिसंबर को दिए गए आदेश में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि, "यदि किसी व्यक्ति को झूठे आरोपों में फंसाया जाता है, तो उसकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान, कारावास, सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा जैसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, जिनके घाव जीवनभर नहीं भरते। अदालत ने कहा कि यह पीड़ा भी उतनी ही गहरी होती है, जितनी वास्तविक यौन उत्पीड़न मामलों में पीड़िता की गरिमा को पहुंचने वाली क्षति।"
वहीं, झूठे रेप के आरोप लगाने और बाद में मुकर जाने के मामले पर जस्टिस शर्मा ने यह भी कहा कि, "जब गंभीर आरोप लगाए जाते हैं और बाद में बिना किसी स्पष्ट वजह के वापस ले लिए जाते हैं, तो इससे यौन हिंसा पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कमजोर हो जाता है। इसका नकारात्मक प्रभाव यह होता है कि जिन महिलाओं के साथ वास्तव में अपराध हुआ है, उनकी बात पर शक किया जा सकता है और उनकी पीड़ा को हल्के में लिया जा सकता है।"
यह टिप्पणी जस्टिस द्वारा तब की गई थी जब एक ऐसे मामले की सुनवाई चल रही थी, जिसमें एक महिला को नौकरी का झांसा देकर तीन लोगों पर रेप करने का आरोप लगाया गया था। पीड़ित महिला ने सुनवाई के दौरान ही अपना फैसला वापस ले लिया। महिला ने बाद में माना कि आरोपियों ने उसे मजबूर नहीं किया था, बल्कि वह एक आरोपी के साथ स्वेच्छा से संबंध में थी। पीड़िता के पलटने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की झूठी शिकायतें आम लोगों के मन में संदेह और झिझक पैदा करती हैं और फिर सच्ची शिकायतों को भी शक भरी नजर से देखा जाता है।