
Delhi gang war: राजधानी दिल्ली का दक्षिणी इलाका, दिल्ली-गुड़गांव सीमा पर स्थित आया नगर गांव, जहां कुछ ही महीनों में दो ऐसी बड़ी घटनाएं घटीं, जिन्होंने पूरे शासन-प्रशासन को हिला कर रख दिया। अंधाधुंध फायरिंग और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका सहम गया। इस ज़मीन पर रंजिश का ऐसा खूनी खेल खेला गया, जो 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की कहानी से कम नहीं था। महज कुछ ही घंटों में इतनी गोलियां चलीं कि पोस्टमार्टम के दौरान शरीर से गोलियां निकालने में डॉक्टरों को करीब दो घंटे लग गए। 'खून के बदले खून' इस मुहावरें को सच साबित करने वाले आया नगर गांव के दो लोहिया परिवार हैं। इस घटना में शामिल एक रतन लोहिया का परिवार है और दूसरा अरुण लोहिया का। आरोप है कि यह फिल्मी स्टाइल में दोनों हत्याएं एक-दूसरे के परिवारों से जुड़े लोगों के द्वारा कराई गईं।
30 तारीख और नवंबर का महीना, हल्का कोहरा और सुबह की ठिठुरन के बीच गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाज। दरअसल, 52 वर्षीय डेयरी मालिक रतन लोहिया जब सुबह- सुबह काम पर जा रहे थे तो उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। जांच में पुलिस ने बताया कि पांच लोगों से भरी एक निसान मैग्नाइट कार ने उन्हें रोका और अंधाधुंध फायरिंग की। रतन ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन यह उन्हें बचा नहीं सकी। पुलिस का कहना है कि हमलावरों ने कुल 72 गोलियां चलाईं, जिनमें से 69 उनके शरीर, कपड़ों और जैकेट में लगीं। सफदरजंग अस्पताल में दो डॉक्टरों को पोस्टमार्टम से पहले गोलियां निकालने में करीब दो घंटे लगे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह हत्या पहले से चल रही बदले की साजिश का हिस्सा थी।
जानकारी के अनुसार, रतन लोहिया की हत्या की पटकथा अरुण लोहिया की हत्या के बाद लिखी गई थी। दरअसल, रतन लोहिया की हत्या के 6 महीने पहले आया नगर से करीब सात किलोमीटर दूर छतरपुर मेट्रो स्टेशन के पास रियल एस्टेट कारोबारी अरुण लोहिया की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, साकेत कोर्ट से लौटते समय अरुण की कार को मारुति ऑल्टो में सवार दो-तीन हमलावरों ने रोका। एक ने ट्रैफिक को रुकने का इशारा किया, जबकि अन्य ने अरुण पर 10 गोलियां चलाईं, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
दोनों हत्याओं की जब जांच की गई तो पता चला कि इनके पीछे पैसों का विवाद था। रतन के बेटे दीपक ने कोविड लॉकडाउन के दौरान नौकरी छूटने के बाद अरुण के रियल एस्टेट कारोबार में कथित तौर पर करीब 25 लाख रुपये निवेश किए थे, लेकिन रकम वापस न मिलने को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया। अप्रैल 2024 में दीपक के साथ अरुण के लोगों द्वारा मारपीट की घटना सामने आई, जिसके बाद अरुण के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया। पंचायत के जरिए समझौते की कोशिशें भी नाकाम रहीं। बाद में अरुण की हत्या के मामले में पुलिस ने दीपक और दो कथित शूटरों योगेश और अजय को गिरफ्तार किया। इसके अलावा दीपक को पनाह देने के आरोप में उसके परिवार के सदस्यों समेत एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
पुलिस को आशंका है कि रतन की हत्या में अवैध विदेशी हथियारों, जैसे जिगाना और बेरेटा पिस्तौल, का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली के आपराधिक इतिहास में यह संभवतः पहली घटना है, जब किसी एक व्यक्ति पर इतनी बड़ी संख्या में गोलियां चलाई गई हों। जांच में पुलिस ने अरुण के चाचा कमल को साजिश का मुख्य किरदार माना है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए अन्य संदिग्धों की पहचान भी की गई है। हालांकि अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, लेकिन वारदात में इस्तेमाल की गई कार पुलिस ने बरामद कर ली है।
जांच एजेंसियां रणदीप भाटी गैंग, अमेरिका में छिपे गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया और हिमांशु भाऊ गिरोह की संभावित संलिप्तता की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक, रतन ने लेवल-2 बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जो हैंडगन की कुछ गोलियों को रोकने में सक्षम होती है, लेकिन 9 मिमी और 30 बोर की गोलियों के सामने बेअसर साबित हुई। वहीं, सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए रतन के परिवार ने अपने छोटे बेटे को विदेश भेज दिया है। परिवार का कहना है कि घटना के बाद से वे लगातार भय के माहौल में जीवन बिता रहे हैं।
Updated on:
01 Jan 2026 05:45 pm
Published on:
01 Jan 2026 05:44 pm
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