मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली में विकास की गंगा बहा देने की बात करते हैं लेकिन ठीक इससे उलट आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय कह रहा है कि दिल्ली रहने लायक नहीं है।
नई दिल्ली। अत्याधुनिक सुविधाओं से लेस विकसित शहरों में से एक राजधानी दिल्ली है लेकिन यह शहर रहने लायक नहीं है। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक सुना कि दिल्ली रहने लायक नहीं है। यह बात मैं नहीं कह रहा हूं बल्कि आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय कह रहा है। मंत्रालय की बात मानें तो दिल्ली रहने लायक नहीं है। दरअसल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली में विकास की गंगा बहा देने की बात करते हैं लेकिन ठीक इससे उलट आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय कह रहा है कि दिल्ली रहने लायक नहीं है।
पहली बार जारी की गई है यह रैंकिंग
आपको बता दें कि आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने विभिन्न सुविधाओं और व्यवस्थाओं के तहत देशभर के 100 शहरों की रैंकिंग की है, जिसमें दिल्ली देश के 64 छोटे-बड़े शहरों से पिछड़ गई है। शासन करने मामले में दिल्ली 50 प्रतिशत अंक भी हासिल नहीं कर पाई। वहीं दूसरी ओर आवासीय सुविधाएं देने तथा मिश्रित भू उपयोग के मामले में भी दिल्ली एकदम फिसड्डी साबित हुई है। दिल्ली को 100 में से कुल 33.18 अंक मिले हैं। बता दें कि सोमवार को केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रलय ने देश के रहने लायक बेहतर शहरों की सूची जारी की। यह पहला अवसर है जब इस तरह की कोई सूची जारी की है। इस रैंकिंग में दिल्ली को 65 वां स्थान दिया गया है। इस सूची के अनुसार दिल्ली का क्षेत्रफल 1484 कि.मी. जबकि जनसंख्या 2011 की जनगणना के तहत 112.92 लाख है। बता दें कि पूणे ने पायदान हासिल किया।
रैंकिंग का पैमाना
आपको बता दें कि पहली बार जारी किए गए इस तरह की रैंकिंग का पैमाना चार श्रेणियों के आधार पर तय किया गया है। इसमें संस्थागत, सामाजिक, आर्थिक और भौतिक के कुल 15 श्रेणियां और 78 ***** थे। सभी 78 सूचकों के लिए 100 अंक थे। संस्थागत और सामाजिक श्रेणी के लिए 25-25 अंक थे। भौतिक परिस्थितियों के लिए अधिकतम 45 अंक थे। बाकी पांच अंक आर्थिक पैमाने के लिए थे। यदि रोजगार देने की बात करें तो दिल्ली पूरी तरह से असफल रही है। जबकि स्वास्थ्य के क्षेत्र में 25 अंक भी हासिल नहीं कर पाई। बता दें कि केजरीवाल सरकार लगातार यह कहती रही है कि उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है और आजादी के बाद से यह पहली ऐसी सरकार है जिन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में इतना काम किया है। लेकिन ताजा आंकड़े केजरीवाल सरकार के दावों की पोल खोल रही है। ठीक इसी तरह से शिक्षा के क्षेत्र में भी अतुलनीय काम करने के बारे में दिल्ली सरकार कहती रहती है लेकिन इस रैंकिंग में शिक्षा के क्षेत्र में भी दिल्ली को बमुश्किल 50 फीसद अंक ही प्राप्त हुए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में केजरीवाल सरकार द्वारा किए गए काम के दावों की भी पोल खुल रही है। वायु प्रदूषण करने के प्रयासों के मामले में दिल्ली को महज 20 अंक मिले तो वहीं बिजली आपूर्ति की श्रेणी में दिल्ली को 20 फीसद अंक मिले हैं। पेयजल आपूर्ति के मामले में 45 फीसद के आसपास अंक मिले हैं।
टॉप 10 में इन शहरों ने जमाया कब्जा
| 1. | पुणे |
| 2. | नवी मुंंबई |
| 3. | ग्रेटर मुंबई |
| 4. | तिरुपति |
| 5. | चंडीगढ़ |
| 6. | ठाणे |
| 7. | रायपुर |
| 8. | इंदौर |
| 9. | विजयवाड़ा |
| 10. | भोपाल |