
देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह पांच मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को हमेशा के लिए तबाह कर दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में गुरुग्राम निवासी विवेक अग्रवाल और उनकी बड़ी बेटी जीविशा भी शामिल हैं। इस घटना में विवेक के परिवार के कुल छह लोगों की मौत की खबर है, जबकि उनकी पत्नी और छोटी बेटी का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।
मिली जानकारी के अनुसार, विवेक अग्रवाल के पिता दिल्ली के मैक्स अस्पताल (Max Hospital Saket) में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पिता की देखभाल के लिए विवेक अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ दिल्ली आए थे। अस्पताल के सामने स्थित उसी गेस्ट हाउस में ठहरे थे, जहां आज सुबह 8 बजे के करीब भीषण आग लगी। विवेक चाहते थे कि वह वेंटिलेटर पर मौजूद पिता की देखभाल अच्छे से कर सके, इसलिए होटल के सामने वाले गेस्ट हाउस में परिवार के साथ रुके थे। इलाज के दौरान वे अपने पिता के करीब रहना चाहते थे।
बुधवार सुबह परिवार के कुछ अन्य रिश्तेदार भी उनसे मिलने पहुंचे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद यह मुलाकात जिंदगी की आखिरी मुलाकात साबित होगी।
परिजनों के मुताबिक, बुधवार सुबह ही विवेक के मौसा और मौसी उनसे मिलने गेस्ट हाउस पहुंचे थे। इसी दौरान इमारत में भयंकर आग लग गई और देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी जद में ले लिया। धुएं और लपटों के बीच फंसे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। मौसा-मौसी की भी मौत हो गई है।
हादसे के बाद परिवार के सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजन अस्पताल के बाहर बेसुध हालत में बैठे हैं और अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।
परिवार का कहना है कि विवेक की पत्नी और उनकी छोटी बेटी के बारे में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।
साकेत स्थित अस्पताल के बाहर का दृश्य बेहद मार्मिक है। अपने प्रियजनों को खो चुके परिवारों के सदस्य रो-रोकर बेहाल हैं। किसी ने अपना बेटा खोया है तो किसी ने पति, जबकि कई परिवारों के एक साथ कई सदस्य इस हादसे का शिकार हो गए।
प्रशासन और बचाव एजेंसियां अब भी राहत एवं जांच कार्य में जुटी हुई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। धुएं के कारण कई लोग बेहोश हो गए और कई लोग बाहर निकलने की कोशिश में घायल हुए। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोग जान बचाने के लिए इमारत से कूदने को मजबूर हो गए। कुछ शव इतनी बुरी तरह जले थे कि उन्हें पहचानना मुश्किल था।