
GRAP 1 Delhi:दिल्ली में प्रदूषण को बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। मध्य दिल्ली में एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम किया जा सके। राजधानी में प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि इन उपायों से हवा की गुणवत्ता में कितना सुधार होता है।
दिल्ली में सर्दियों का मौसम आते ही प्रदूषण की चिंता बढ़ने लगती है। हवा की रफ्तार कम होने पर धूल और धुएं के कण लंबे समय तक वातावरण में बने रह सकते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और सड़कों पर जमा मिट्टी हवा को प्रदूषित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में समय रहते इन कारणों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।
मध्य दिल्ली में एंटी स्मॉग गन के जरिए पानी की बारीक बूंदों का छिड़काव किया गया। यह मशीन पानी को छोटे-छोटे कणों के रूप में हवा में फैलाती है, जिससे धूल के कण नीचे बैठने में मदद मिलती है। इससे सड़कों और आसपास के इलाकों में उड़ने वाली धूल को कम किया जा सकता है।
हालांकि, इस तरीके से प्रदूषण के सभी कारणों पर काबू नहीं पाया जा सकता। वाहनों से निकलने वाला धुआं और दूसरे स्रोतों से होने वाला प्रदूषण कम करने के लिए अलग से कदम उठाने पड़ते हैं। इसलिए केवल पानी का छिड़काव करना काफी नहीं है, बल्कि सड़कों की सफाई और निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कराना भी जरूरी है।
दिल्ली में GRAP-1 लागू होने के साथ प्रदूषण फैलाने वाले कारणों पर नजर रखने और धूल कम करने जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत सड़कों की नियमित सफाई, जरूरत के मुताबिक पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के नियमों का पालन अहम है।
इन उपायों का फायदा तभी मिलेगा, जब संबंधित विभाग लगातार निगरानी करें और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी हो। इसके साथ लोगों को भी खुले में कचरा जलाने से बचने और निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने जैसे कदम उठाने होंगे।
दिल्ली में प्रदूषण कितना बढ़ेगा या घटेगा, यह मौसम, हवा की रफ्तार और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निर्भर करता है। एंटी स्मॉग गन से छिड़काव धूल कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे पूरी हवा साफ होने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
फिलहाल प्रशासन की कोशिश प्रदूषण को बढ़ने से रोकने की है। आने वाले दिनों में हवा की शुद्वता के आंकड़े बताएंगे कि इन उपायों का कितना असर पड़ा।