
Delhi Professor Murder Case: पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित वसुंधरा एन्क्लेव में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल (45) की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस ने सितंबर के पहले हफ्ते में अदालत में 300 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि पश्चिम बंगाल के वर्धमान स्थित 1,000 वर्ग गज से अधिक की पुश्तैनी जायदाद को हड़पने और मकान खाली न करने की नीयत से किराएदार दंपति ने इस खूनी साजिश को अंजाम दिया था।
पुलिस के अनुसार, देबोस्मिता पॉल और उनकी मां वर्धमान में 1,000 वर्ग गज से अधिक की संपत्ति की संयुक्त मालिक थीं। आरोपी दंपति बीते कुछ समय से इस मकान के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर किराएदार के रूप में रह रहा था। पिछले साल प्रोफेसर देबोस्मिता अपनी मां के साथ वर्धमान गई थीं और किराएदार को जून तक मकान खाली करने को कहा था। इसके बाद मार्च में फोन पर दोबारा यही मांग दोहराई गई।
मकान खाली करने का नोटिस मिलते ही आरोपी पति (जो एक हार्डवेयर दुकान में काम करता है) ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर प्रोफेसर की हत्या की साजिश रची। उन्हें लगा कि देबोस्मिता के परिवार के अन्य सदस्यों की इस जायदाद में कोई खास दिलचस्पी नहीं है और उनकी मौत के बाद वे संपत्ति पर आसानी से कब्जा कर लेंगे।
चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी पति ने हत्या से पहले दिल्ली आकर तीन बार प्रोफेसर के घर, दिनचर्या और कॉलेज की गतिविधियों की रेकी की थी। 2 जून को आरोपी अपनी पत्नी और 10 वर्षीय बेटे के साथ वर्धमान से दिल्ली पहुंचा और फर्जी पहचान पत्र (ID) के जरिए एक होटल में ठहरा।
अगले दिन 3 जून को दोपहर करीब 3:20 बजे दंपति अपने बेटे के साथ प्रोफेसर के फ्लैट पर पहुंचा। जान-पहचान होने के कारण देबोस्मिता ने दरवाजा खोल दिया। घर के अंदर घुसते ही आरोपियों ने बच्चे के हाथ में मोबाइल फोन थमा दिया और प्रोफेसर को दूसरे कमरे में ले गए।
कमरे के अंदर आरोपियों ने प्रोफेसर के सिर पर सिलबट्टे से वार किया, चेहरे पर कई हमले किए और दोनों कलाइयों की नसें काट दीं। शोर सुनकर जब 10 साल का बेटा कमरे में पहुंचा, तो उसने पूरी वारदात अपनी आंखों से देखी। पुलिस ने इस मामले में 10 वर्षीय मासूम को मुख्य गवाह बनाया है। वारदात को अंजाम देने, कपड़े बदलने और सोसाइटी से बाहर निकलने में आरोपियों को महज 15 मिनट का समय लगा।
हत्या के बाद आरोपियों ने खून से सने कपड़े देबोस्मिता के घर पर ही बदल लिए और फरार हो गए। हालांकि, यही चालाकी उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। पुलिस ने जब सोसाइटी के 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, तो उसमें नकाबपोश दंपति जाते समय बदला हुआ लिबास पहने दिखा, लेकिन उनके साथ मौजूद बच्चा उन्हीं कपड़ों में था।
कैब ड्राइवर से पूछताछ और होटल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस आरोपियों के वर्धमान कनेक्शन तक पहुंची। दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम ने वर्धमान पहुंचकर 100 से अधिक घरों में तलाशी अभियान चलाया और आखिरकार दंपति को दबोच लिया। आरोपी बच्चे को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश कर उसके रिश्तेदारों की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।