
Delhi SIR 2026: दिल्ली में मतदाता सूची को लेकर चल रही SIR प्रक्रिया पर सियासत तेज हो गई है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा है कि किसी मतदाता को नोटिस मिलना यह नहीं है कि उसका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। पहले उसे अपनी बात रखने और जरूरी कागजात देने का मौका दिया जाता है।
प्रवेश वर्मा के मुताबिक, दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में मतदाता सूची की जांच का काम चल रहा है। इस दौरान अगर किसी व्यक्ति के दस्तावेजों में जानकारी अधूरी मिलती है या रिकॉर्ड में कोई कमी नजर आती है तो चुनाव अधिकारी यानी ERO की ओर से उसे नोटिस भेजा जाता है।
नोटिस मिलने के बाद मतदाता से जरूरी जानकारी या दस्तावेज मांगे जाते हैं। यानी उसे अपनी स्थिति साफ करने का मौका मिलता है। प्रवेश वर्मा ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि SIR के दौरान उसके नाम को लेकर कोई दिक्कत हो रही है तो वह जरूरी कागजात देकर अपना पक्ष रख सकता है।
दिल्ली में SIR को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है, क्योंकि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जांच के दायरे में आए हैं। हाल में सामने आई जानकारी के मुताबिक करीब 33.1 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं। वहीं ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.5 लाख नाम शामिल नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना अपने आप में नाम काटने का आखिरी फैसला नहीं है।
SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है। इस संबंध में दायर याचिका में बड़ी संख्या में भेजे गए नोटिस और उनके कारणों को लेकर जानकारी मांगी गई है। इस मामले पर 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है।
प्रवेश वर्मा ने कहा कि मतदाताओं को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। अगर इसके बाद भी किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में नहीं आता है तो वह अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।
फिलहाल दिल्ली में SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। वहीं जिन लोगों को नोटिस मिला है, उनके लिए जरूरी है कि वे इसे नजरअंदाज न करें और मांगे गए दस्तावेज समय पर जमा कर अपना जवाब दें।