
Sanjay Saraogi
Voter List Revision: पटना से उठी संजय सरावगी की बात ने SIR को लेकर चल रही बहस का फोकस एक अहम सवाल पर ला दिया है क्या नोटिस मिलना सीधे मतदाता सूची से नाम हटने का संकेत है? बिहार बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा समझना सही नहीं होगा। उनका कहना है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व सेना प्रमुख और सीबीआई निदेशक जैसे बड़े नामों को नोटिस मिलना बताता है कि रिकॉर्ड की जांच एक समान प्रक्रिया के तहत हो रही है।
पटना में बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने SIR को लेकर विपक्ष के लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रक्रिया के जरिए चुनिंदा लोगों के नाम हटाने की बात कही जा रही है, तो बड़े पदों पर रहे लोगों और मौजूदा वरिष्ठ अधिकारियों को जारी नोटिस भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
सरावगी के मुताबिक, SIR का नोटिस अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटने का फैसला नहीं है। नोटिस पाने वाले व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है। इसके बाद दावे-आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई होती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली में SIR के दौरान केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर, उनकी पत्नी क्योको जयशंकर, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, CBI निदेशक प्रवीण सूद और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ मामलों में मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को पुराने SIR रिकॉर्ड से जोड़ा नहीं जा सका, जबकि कुछ रिकॉर्ड में नाम या पारिवारिक विवरण से जुड़ी विसंगतियां सामने आईं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भी स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होना अंतिम रूप से नाम हटाए जाने के बराबर नहीं है। संबंधित मतदाता को जवाब देने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। उचित प्रक्रिया और आदेश के बाद ही किसी रिकॉर्ड पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।
दिल्ली की मौजूदा SIR प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियां चिह्नित की गई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड दो प्रमुख श्रेणियों ‘No Mapping’ और ‘Logical Discrepancies’ में आए हैं। ‘No Mapping’ का अर्थ है कि मौजूदा रिकॉर्ड का पुराने SIR रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया, जबकि दूसरी श्रेणी में नाम, उम्र, पारिवारिक विवरण या अन्य जानकारियों में अंतर जैसे मामले शामिल हैं।
इसलिए किसी व्यक्ति को नोटिस मिलने से अकेले यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह अपात्र है या उसका वोट समाप्त हो गया है। अंतिम स्थिति सत्यापन, दस्तावेज और संबंधित निर्वाचन अधिकारी के निर्णय के बाद ही तय होगी।
Updated on:
21 Sept 2026 10:23 am
Published on:
21 Sept 2026 09:59 am
