
Election Commission ECINET: मतदाता सूची में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। अब चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET को लेकर भी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस सिस्टम को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े काम एक जगह से ज्यादा नियंत्रित होने लगे हैं, जिसका असर स्थानीय स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों और मतदाताओं पर पड़ सकता है।
सुरजेवाला ने 29 सितंबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ECINET के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार से जुड़े कामों में स्थानीय चुनाव अधिकारियों की भूमिका कम हो रही है। उनका दावा है कि इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनके पास जरूरी कागजात नहीं हैं या जो एक जगह से दूसरी जगह काम के लिए जाते रहते हैं।
सुरजेवाला ने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया का हवाला देते हुए दावा किया कि मसौदा मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों के नाम शामिल नहीं थे। उन्होंने खास तौर पर बेघर, आदिवासी और दूसरे राज्यों से आकर काम करने वाले लोगों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। हालांकि, ये सुरजेवाला के आरोप और दावे हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और ECINET की व्यवस्था को लेकर अलग पक्ष रखा है।
ECINET को लेकर उठे सवालों पर चुनाव आयोग का कहना है कि यह कोई पूरी तरह से केंद्रीकृत व्यवस्था नहीं है। आयोग के मुताबिक, सिस्टम में अलग-अलग अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी के हिसाब से पहुंच दी गई है और मतदाता सूची से जुड़े कानूनी अधिकार संबंधित अधिकारियों के पास ही हैं।
मामला यहीं नहीं रुका। ECINET को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक समीक्षा समिति बनाने का फैसला किया। वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता वाली इस समिति में IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। समिति अब यह देखेगी कि ECINET मौजूदा कानून और नियमों के हिसाब से ठीक तरीके से काम कर रहा है या नहीं।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर आयोग ने कुछ बदलाव किए हैं। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ी या नाम को लेकर सवाल हैं, उनके दस्तावेज लेने के लिए BLO को घर जाने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, ऐसे मतदाताओं को हर मामले में ERO कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी।
महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया भी चल रही है। ऐसे में ECINET को लेकर उठे सवालों और चुनाव आयोग की समीक्षा पर अब नजर रहेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि मौजूदा सिस्टम में बदलाव की जरूरत है या नहीं।