Delhi auto driver murder: दिल्ली में मोबाइल लूट का विरोध करने पर 22 साल के ऑटो चालक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, दो आरोपियों की तलाश अभी जारी है।
Delhi auto driver murder: दिल्ली में एक ऐसी वारदात सामने आई है, जो सिर्फ लूट के इरादे से शुरू हुई लेकिन देखते ही देखते हत्या में बदल गई। 5 अप्रैल कोे सुबह के समय हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास 22 साल के ऑटो चालक सूरज कुमार ने पांच युवकों को अपनी गाड़ी में बैठाया। उन्होंने उसे कनॉट प्लेस चलने को कहा। शुरुआत में यह एक नॉर्मल सवारी जैसी ही लग रही थी, लेकिन थोड़ी ही देर में सब कुछ बदल गया। ड्राइवर के गलत का विरोध करने पर मामला इतना बढ़ गया कि उन्होंने उसकी हत्या कर दी। इस घटना ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ऑटो में बैठते ही चालक का मोबाइल और सामान छीनने की कोशिश शुरू कर दी। सूरज ने हिम्मत दिखाते हुए विरोध किया, जो उसे भारी पड़ गया। पांचों आरोपियों ने मिलकर सूरज के गर्दन और सीने पर कई बार चाकू से हमला किया। हमला इतना गंभीर था कि वह वहीं लहूलुहान हो गया। हमले के बाद आरोपी उसे शिवाजी पार्क बस स्टैंड के पास फेंककर ऑटो के साथ फरार हो गए। सुबह 5:31 बजे एक आदमी की नजर सूरज पर पड़ी, जिसके बाद उसने तुरंत पीसीआर को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उसे लोक नायक अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
शुरुआत में पुलिस के पास इस वारदात को कोई गवाह नहीं था। इस वजह से पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों का सहारा लिया। अलग-अलग जगहों के फुटेज देखकर आरोपियों की हरकतों को ट्रैक किया गया। इससे पता चला कि वे दिल्ली, फरीदाबाद और पलवल के बीच घूम रहे थे। इसके बाद पुलिस ने पलवल रेलवे स्टेशन के पास जाल बिछाकर 12 घंटे की निगरानी के बाद दो आरोपियों को पकड़ लिया। उनसे चोरी किया गया ऑटो, मोबाइल, खून से सने कपड़े और चाकू बरामद हुआ। पूछताछ के आधार पर एक और आरोपी को सराय काले खां से गिरफ्तार किया गया, लेकिन अभी भी दो आरोपी फरार हैं। उनकी तलाश अभी जारी है।
सूरज कुमार की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनकी बहन शिल्पी कुमारी ने बताया कि सूरज के एक साल का बच्चा है और उसकी पत्नी प्रेगनेंट भी है। परिवार कुछ महीने पहले ही नागालैंड से दिल्ली आया था। शिल्पी ने बताया कि उनके पति ने ऑटो खरीदा था, जिसे वे दिन में चलाते थे, जबकि सूरज रात में काम करता था। साथ ही वह अपने दो छोटे भाइयों की पढ़ाई का भी ख्याल रखता था।
जांच में एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है। आरोपी अक्सर देर रात ट्रेन से पलवल से दिल्ली आते थे और रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड के पास लोगों को निशाना बनाते थे। वे रात के अंधेरे में लूट और हमले की वारदात को अंजाम देते और सुबह होने से पहले वापस पलवल लौट जाते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें।