नई दिल्ली

क्या होती है फॉर्मूला-1 रेस? ग्रेटर नोएडा में 13 साल बाद ‌जापान समेत कई देशों की कंपनियां दिखाएंगी ‘जलवा’

Formula 1 Race India: दिल्ली से सटे यमुना सिटी के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में 13 साल बाद फॉर्मूला-1 रेस की वापसी की तैयारी शुरू हो गई है। विदेशी कंपनियों और सरकार के इंटरेस्ट से रेस के वापस से शुरू होने की उम्मीदें बढ़ रही हैं।

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13 साल बाद यमुना सिटी में हो सकती है फॉर्मूला-1 रेस

Formula 1 Race India:दिल्ली से सटी यमुना सिटी में बना बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) एक बार फिर चर्चा में है। यहां फॉर्मूला-1 रेस कराने की तैयारी शुरू हो गई है। जापान समेत कई देशों की बड़ी कंपनियां इस सर्किट पर इंटरनेशनल रेस आयोजित करने में इंटरेस्ट दिखा रही हैं। 13 साल बाद यह रेस होने जा रही है, इसलिए रेसिंग पसंद करने वाले लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। वहीं तैयारियों के बीच केंद्रीय खेल मंत्री ने बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का दौरा किया है और वहां की जा रही व्यवस्था की जांच की है।

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पिछले महीने किया था दौरा

पिछले महीने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और खेल मंत्री मनसुख मांडविया यमुना सिटी के सेक्टर-25 में बने बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट गए थे। उन्होंने वहां रेस ट्रैक, पिट-लेन, दर्शकों के बैठने की जगह और बाकी सुविधाओं को ध्यान से देखा। उनका उद्देश्य यह जानना था कि सर्किट की हालत ठीक है या नहीं और यहां बड़े इंटरनेशनल मुकाबले कराए जा सकते हैं या नहीं। माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद ही खेल मंत्रालय ने यहां फिर से बड़ी रेस कराने की संभावनाओं पर काम शुरू किया है।

13 साल बाद होगी रेस

13 साल बाद यहां फिर से रेस होने की उम्मीद जग रही है। बताया जा रहा है कि अगर अडानी ग्रुप और जेपी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां इस प्रोजेक्ट से जुड़ेंगी तो भारत में रेस को वापस लाने में मदद मिलेगी। आपको बता दें कि 2013 के बाद से कोई फॉर्मूला-1 रेस नहीं हुई है। काफी समय बाद 2023 में यहां मोटो जीपी रेस जरूर हुई थी। इसे तीन साल तक कराने का प्लान था, लेकिन आयोजक कंपनी की गड़बड़ियों के कारण फिलहाल इस रेस पर भी रोक लग गई है। वहीं, फॉर्मूला-1 को दोबारा भारत लाना आसान नहीं माना जा रहा है। अभी कैलेंडर में 24 रेस हैं और दुनियाभर के देशों ने इसे होस्ट करने की इच्छा दिखाई है। एक रेस के आयोजन में दो करोड़ से 6 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

क्या होती है फॉर्मूला-1 रेस?

फॉर्मूला-1 रेस दुनिया की सबसे तेज कार रेस मानी जाती है। इसमें खास तरह की सिंगल-सीटर कारें दौड़ती हैं। इन कारों की स्पीड 300 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा हो सकती है। फॉर्मूला-1 की रेस अलग-अलग देशों में बने खास ट्रैक पर होती है। इसमें सिर्फ तेज चलाना ही नहीं, बल्कि ड्राइवर की समझ, टीम की प्लानिंग और कार की मजबूती भी बहुत मायने रखती है। इसी वजह से लोग इसे देखना बहुत पसंद करते हैं और यह रेस काफी रोमांचक मानी जाती है।

सुपर फॉर्मूला रेस पर भी चर्चा तेज

फॉर्मूला-1 के अलावा जापान की मशहूर सुपर फॉर्मूला रेस को भी भारत लाने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में जापान रेस प्रमोशन कंपनी के लोग बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट देखने आए थे। यह रेस अभी तक सिर्फ जापान में ही होती रही है और साल 2023 में इसके 50 साल पूरे हुए थे। अब इस रेस को पहली बार भारत में कराने पर गंभीरता से बातचीत चल रही है। अगर ऐसा हुआ, तो यह भारतीय रेसिंग के लिए एक नई और बड़ी शुरुआत साबित हो सकती है। अगर जापान सुपर फॉर्मूला या फॉर्मूला-1 में से कोई भी रेस यहां कराने पर सहमति बन जाती है, तो इसका फायदा सिर्फ रेसिंग तक ही नहीं रहेगा। इससे यमुना सिटी का नाम दुनिया भर में पहुंचेगा, यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को भी रोजगार के मौके मिलेंगे। भारत की खेलों के क्षेत्र में पहचान भी और मजबूत होगी।

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Updated on:
03 Feb 2026 03:27 pm
Published on:
03 Feb 2026 03:21 pm
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