नई दिल्ली

छात्राओं का यौन शोषण मामला; स्वामी चैतन्यानंद केस में बड़ा अपडेट, कोर्ट में वकील से भिड़ी दिल्ली पुलिस

Chaitanyananda Saraswati: चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी के वकील ने कोर्ट में कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। दिल्ली पुलिस ने वकील का विरोध करते हुए मजिस्ट्रेट के सामने अश्लील तस्वीरें, कमेंट्स, व्हाट्सएप चैट्स और स्क्रीन शॉट दिखाए।

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इंस्टीट्यूट में छात्राओं का यौन शोषण मामला।

दिल्ली के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्‍थान में बतौर निदेशक तैनात रहे 17 छात्राओं का यौन शोषण करने के आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी अपनी जमानत के लिए बार-बार कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहा है, लेकिन उसपर लगे आरोप इतने गंभीर हैं कि कोर्ट में हर बार उसे निराशा हाथ लग रही है। दूसरी ओर, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जल्द मामले की जांच पूरी करने का निर्देश दिया। हालांकि दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि जांच अधिकारी ने अब तक 17 में से 9 लड़कियों के बयान दर्ज किए हैं। बाकी लड़कियां अभी दिल्ली से बाहर हैं, उन्हें भी जांच में शामिल होने के लिए दिल्ली बुलाया गया है। इसी बीच दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती की हिरासत बढ़ा दी है। अब चैतन्यानंद सरस्वती की जमानत याचिका पर सुनवाई सात नवंबर को होगी। जबकि उसे 14 नवंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।

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तीसरी बार 'डर्टी बाबा' की बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत

दरअसल, पटियाला हाउस कोर्ट ने 3 अक्टूबर को चैतन्यानंद सरस्वती को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। बाद में इस हिरासत को बढ़ाकर 31 अक्टूबर तक कर दिया गया था। अब तीसरी बार फिर कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत आगे बढ़ा दी है। दूसरी ओर, 27 अक्टूबर को एडिशनल सेशंस जज दीप्ति देवेश ने दिल्ली पुलिस को चैतन्यानंद सरस्वती पर लगे आरोपों की जांच कर अद्यतन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसपर पुलिस ने अदालत को बताया कि जांच अधिकारी ने अब तक 17 में से 9 छात्राओं के बयान दर्ज किए हैं। इसके साथ ही उनका परीक्षण पूरा हो चुका है, जबकि शेष छात्राएं फिलहाल दिल्ली से बाहर हैं। उन्हें भी जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है।

कोर्ट में वकील और पुलिस की गरमा-गरम बहस

कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने जांच पूरी होने तक स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी को न्यायिक हिरासत में ही रखने की बात कही। पुलिस का तर्क था कि चैतन्यानंद के बाहर आने से पीड़िताएं और जांच दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसी बीच चैतन्यानंद सरस्वती की ओर से कोर्ट में पेश वकील ने अपनी दलीलें देनी शुरू कर दीं। चैतन्यानंद के वकील ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पुलिस के पास अभी तक कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। कोर्ट में वकील की दलील का विरोध करते हुए जांच अधिकारी ने कहा कि चैतन्यानंद सरस्वती के खिलाफ कई ठोस और गंभीर सबूत मिले हैं, जिनमें अश्लील तस्वीरें, टिप्पणियां और उनके स्क्रीनशॉट शामिल हैं।

आगरा से गिरफ्तार किया गया था 'डर्टी बाबा'

दिल्ली के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्‍थान में 17 छात्राओं के यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद चैतन्यानंद सरस्वती अंडरग्राउंड हो गया था। कड़ी मशक्कत के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे आगरा से गिरफ्तार किया था। आरोप हैं कि स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती ने बतौर निदेशक अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संस्‍थान की 17 छात्राओं का यौन शोषण किया। इतना ही नहीं, वह हर रात एक छात्रा को अपने कमरे में बुलाता था, जहां उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाता था। इसके बाद छात्रा को मुंह बंद रखने की धमकी देता था। इस काम में संस्‍थान का कुछ स्टाफ भी उसका साथ देता था। चैतन्यानंद के निर्देश पर महिला स्टाफ छात्राओं के मोबाइल फोन से अश्लील चैट्स और मैसेजेस डिलीट करवाता था। वह हमेशा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं को निशाना बनाता था।

छात्राओं के वॉशरूम तक लगवाए थे कैमरे

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि चैतन्यानंद को कॉलेज के सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस प्राप्त था। उसने वॉशरूम के पास कैमरे लगवाए थे ताकि छात्राओं पर नजर रख सके। इसके अलावा, उस पर वित्तीय गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े के भी आरोप हैं। पुलिस ने उसकी बीएमडब्ल्यू कार भी जब्त की थी। स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ डॉ. पार्थ सारथी खुद को आध्यात्मिक गुरु बताता है। वह मूल रूप से ओडिशा का निवासी है। हालांकि, छात्राओं से यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद स्रंगेरी शारदा पीठ ने उसे अपने पद से हटा दिया है।

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