
Election Commission of India: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। तीनों की नियुक्ति रद्द करने की मांग वाली याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाए गए 2023 के कानून में जो तरीका बताया गया है, उसका पालन नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से 'क्वो वारंटो' जारी करने की मांग की है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अदालत यह जांच सकती है कि कोई व्यक्ति जिस सरकारी पद पर बैठा है, उस पर बने रहने का उसे कानूनी अधिकार है या नहीं।
याचिका में कहा गया है कि कानून के मुताबिक हर खाली पद के लिए पांच नामों की सूची तैयार की जानी चाहिए थी। इसके बाद इसी सूची में से नाम चुनने की प्रक्रिया आगे बढ़नी थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि ऐसा नहीं किया गया और तय तरीके के मुताबिक प्रक्रिया पूरी किए बिना नियुक्तियां कर दी गईं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2024 के आदेश का भी हवाला दिया गया है। इसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर जल्दबाजी से बचने और चयन समिति के सदस्यों को उम्मीदवारों की पूरी जानकारी पहले देने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में भी इस बात का ध्यान नहीं रखा गया।
याचिका में नियुक्ति की प्रक्रिया के साथ-साथ तीनों अधिकारियों की योग्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि तीनों अधिकारियों ने इससे पहले चुनाव से जुड़े काम नहीं संभाले थे।
याचिकाकर्ता ने 2023 के कानून की धारा 5 का हवाला देते हुए कहा है कि नियुक्ति के लिए तय शर्तें भी पूरी नहीं की गईं। हालांकि, ये सभी बातें याचिका में लगाए गए आरोप हैं। इन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी आना बाकी है।
चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से भी एक मामला चल रहा है। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार के कुछ फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ फैसले दूसरे चुनाव आयुक्तों की सहमति या जानकारी के बिना लिए गए।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था। अब तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली नई याचिका सामने आने से चुनाव आयोग को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई और आगे बढ़ गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट इस नई याचिका पर क्या रुख अपनाता है।