नई दिल्ली

छात्र आंदोलन को मिला कानूनी समर्थन, सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने उठाई न्याय की मांग; जंतर-मंतर पर पढ़ी संविधान की प्रस्तावना

Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के वकील सामने आए। संविधान की प्रस्तावना पढ़कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और छात्रों के लिए न्याय की मांग की।
2 min read
Supreme Court Lawyers
छात्रों के समर्थन में उतरे सुप्रीम कोर्ट के वकील, संविधान की प्रस्तावना पढ़कर जताया विरोध। फोटो सोर्स- PTI

Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन अब और बड़ा होता नजर आ रहा है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के कई वकील भी छात्रों के समर्थन में सामने आए। उन्होंने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

वकीलों का कहना था कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। अगर छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें रोका नहीं जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि कानून का पालन करने के साथ-साथ लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी जरूरी है।

अपने लिए नहीं, छात्रों के हक के लिए खड़े हुए

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वकील अपने लिए नहीं, बल्कि छात्रों के हक में खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह किसी एक संगठन या व्यक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि छात्रों को न्याय दिलाने की बात है। जब युवाओं के अधिकारों पर सवाल उठते हैं, तब वकीलों का भी कर्तव्य बनता है कि वे उनके साथ खड़े हों।

इंदिरा जयसिंह ने कहा कि देश की सबसे बड़ी अदालत का काम हर व्यक्ति को न्याय देना है। इसी उम्मीद के साथ वकील अपनी मांग लेकर सामने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और विरोध जताना कोई गलत बात नहीं है। ऐसे मामलों में सभी को निष्पक्ष न्याय मिलना चाहिए।

प्रस्तावना पढ़कर दिया बड़ा संदेश

प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने संविधान की प्रस्तावना पढ़कर न्याय, समानता और आजादी जैसे मूल्यों की याद दिलाई। उनका कहना था कि संविधान सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि हर नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी है। इसलिए छात्रों से जुड़े मामलों में भी संविधान की भावना के अनुसार फैसला होना चाहिए।

जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। समाज के अलग-अलग वर्ग भी उनके समर्थन में आगे आने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का इस तरह खुलकर साथ देना इस आंदोलन को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इस पूरे मामले पर आगे क्या फैसला लेती हैं।

Updated on:
23 Jul 2026 02:42 pm
Published on:
23 Jul 2026 02:42 pm