
Kapil Mishra Allegations: दिल्ली में एक दलित व्यक्ति पर कथित हमले का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिख रहा है। इस मामले में दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। दावा है कि पुलिस हिरासत में मौजूद स्वतंत्र भारद्वाज ने मंत्री कपिल मिश्रा को फोन किया था और अपनी रिहाई में मदद मांगी थी। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिस पर केस में हत्या की कोशिश यानी धारा 307 नहीं लगाने का दबाव बनाया गया।
हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में यह साफ होना बाकी है कि हिरासत में रहते हुए वास्तव में फोन किया गया था या नहीं और अगर किया गया था तो बातचीत में क्या कहा गया।
मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब एक पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़ा बयान सामने आया। इसमें दावा किया गया कि कथित हमले में घायल दलित व्यक्ति को करीब 60 टांके लगे थे और उसकी हालत गंभीर थी। आरोप लगाने वालों का कहना है कि ऐसी स्थिति में केस में धारा 307 लगनी चाहिए थी।
इसी के साथ यह सवाल भी उठाया गया कि स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर एक दिन के भीतर ही बाहर कैसे आ गया। इसी वजह से कपिल मिश्रा को किए गए कथित फोन को लेकर राजनीतिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस मामले को लेकर CJP नेता सौरव दास ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर किसी आरोपी ने पुलिस हिरासत से किसी मंत्री से संपर्क किया और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश हुई, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सौरव दास की ओर से यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि आम प्रदर्शनकारियों के मामलों में पुलिस जिस तरह सख्ती दिखाती है, क्या गंभीर आरोपों का सामना कर रहे किसी व्यक्ति को राजनीतिक पहुंच का फायदा मिलना चाहिए?
सौरव दास ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों से भी की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को नियम-कानून बताए जाते हैं, पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ता है और कई बार मुकदमे भी दर्ज होते हैं। ऐसे में गंभीर आरोपों वाले किसी व्यक्ति को कथित राजनीतिक मदद मिलने की बात सामने आती है तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी आधार पर कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग भी की जा रही है। हालांकि, यह मांग तभी और गंभीर हो सकती है जब मंत्री की कथित भूमिका की पुष्टि जांच में होती है।
पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज के हवाले से यह भी दावा किया गया कि वह कपिल मिश्रा और चिराग पासवान को अपना 'बड़ा भाई' मानते हैं और उन्हें कई नेताओं का समर्थन हासिल है।
कांग्रेस सांसद और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मामले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस अपराध में स्वतंत्र भारद्वाज को धारा 307 के तहत जेल में होना चाहिए था, वह बाहर घूम रहे हैं। इमरान प्रतापगढ़ी ने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए पूछा कि क्या पुलिस इस मामले को देख रही है। उन्होंने इसे भाजपा सरकार द्वारा पोषित अपराधियों से जोड़ते हुए भी आरोप लगाए हैं।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुलिस हिरासत से कपिल मिश्रा को फोन किया गया था और क्या पुलिस पर धारा 307 को लेकर कोई दबाव बनाया गया? इसका जवाब पुलिस रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।