नई दिल्ली

126 दिन केजरीवाल जेल में थे और सिसोदिया 503 दिन…इसकी भरपाई कौन करेगा? कपिल सिब्बल ने सरकार से पूछा सवाल

Arvind Kejriwal: दिल्ली शराब नीति मामले में कोर्ट से अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 आम आदमी पार्टी नेताओं को बरी किए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कपिल सिब्बल ने सीबीआई पर जांच को जानबूझकर लंबा खींचने का आरोप लगाते हुए सरकार से जेल में बिताए गए समय की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

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Arvind Kejriwal: दिल्ली शराब घोटाले के मामले में कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 आप नेताओं को बरी कर दिया है। कोर्ट का फैसला आने के बाद से प्रदेश में जमकर सियासत हो रही है। भाजपा के नेताओं के लगातार बयान आ रहे हैं कि अभी केवल नीचली अदालत का फैसला आया है तो वहीं, आम आदमी पार्टी का कहना है कि चुनाव जीतने के लिए केवल केजरीवाल को बदनाम किया गया है। इसी क्रम में राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सीबीआई पर जानबूझकर मामले को लंबा खींचने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्हेंने सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा है कि अरविंद केजरीवाल 126 दिन और मनीष सिसोदिया 503 दिन जेल में थे इसकी भरपाई कौन करेगा?

आपको बता दें कि कोर्ट ने शराब घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी के नेताओं को शुक्रवार को बरी कर दिया था, जिसको लेकर अरविंद केजरीवाल ने प्रेसवार्ता की और जमकर प्रधानमत्री और अमित शाह पर बरसे। अब शनिवार को राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को आबकारी नीति प्रकरण को लेकर जांच एजेंसी सीबीआई पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एजेंसी भली-भांति जानती थी कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आरोप साबित करने लायक ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं हैं, इसके बावजूद जांच को जानबूझकर लंबा खींचा गया। सिब्बल का आरोप था कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इस दावे के समर्थन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।

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सिब्बल ने मांगा जेल का हिसाब

प्रेसवार्ता के दौरान सिब्बल ने जेल में बिताए गए समय का हवाला देते हुए उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि 27 फरवरी को अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद सवाल उठता है कि केजरीवाल को 126 दिन और सिसोदिया को 503 दिन जेल में रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इतने लंबे समय तक हिरासत में रखने की भरपाई कौन करेगा और इसकी जवाबदेही किस पर तय होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का दावा किया गया, तो न तो किसी तरह की वसूली हुई और न ही किसी वित्तीय लेनदेन के ठोस सबूत सामने आए।

घोटाले में नहीं मिले पर्याप्त सबूत

आम आदमी पार्टी के लिए यह फैसला बड़ी कानूनी कामयाबी के रूप में सामने आया है। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को अदालत ने सीबीआई से जुड़े मामलों में राहत देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रहा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उन्हें प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद न हों। इस निर्णय को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी कानूनी और राजनीतिक राहत माना जा रहा है।

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