
Arvind Kejriwal statement: दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई अब सिर्फ एक विरोध-प्रदर्शन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। इस बीच उन्होंने RML अस्पताल पहुंचकर NEET मुद्दे पर हुए CJP प्रदर्शन में घायल छात्रों से मुलाकात की। उनके साथ में सौरभ भारद्वाज, आतिशी और अन्य नेता भी शामिल रहे।
केजरीवाल ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से निहत्थे युवाओं पर कार्रवाई हुई, वह बेहद चिंताजनक है। केजरीवाल ने दावा किया कि मोदी सरकार ने इस मामले में अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ दिया।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में छात्र पुलिस के सामने हाथ जोड़ते नजर आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर लाठियां बरसाई गईं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कई अभिभावक सोशल मीडिया पर अपने बच्चों के लापता होने की जानकारी साझा कर रहे हैं और आशंका जता रहे हैं कि उन्हें हिरासत में लिया गया है।
केजरीवाल ने अपने बयान में इतिहास का भी जिक्र किया और इस घटना की तुलना जलियांवाला बाग कांड से करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, सरकार और पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा गया है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए थे। पुलिस का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पत्थर फेंके, पुलिस और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस के मुताबिक, इस झड़प में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि करीब 60 प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं।
मामला केवल सड़क पर हुए टकराव तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारियों की मांगों ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। CJP प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, NEET विवाद में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई जैसी मांगें रखीं। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने साफ कहा है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, सरकार ने बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा पुलिस कार्रवाई और केजरीवाल के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने इसे लोकतंत्र में असहमति दबाने का उदाहरण बताया। अब सवाल यही है कि क्या यह विवाद केवल एक प्रदर्शन तक सीमित रहेगा या आने वाले दिनों में यह केंद्र सरकार बनाम विपक्ष की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का रूप लेगा।