
नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को अब देशभर से समर्थन मिलने लगा है। सोमवार को ‘संसद मार्च’ के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद आंदोलन और तेज हो गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया है। इसी बीच मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल बुधवार को जंतर-मंतर पहुंचे और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके से मुलाकात कर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
जंतर-मंतर पर छात्रों को संबोधित करते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन की ताकत सबसे बड़ी होती है। यहां मौजूद छात्रों और युवाओं को किसी भी हालत में विरोध-प्रदर्शन वाली जगह से नहीं हटना है, नहीं तो सरकार इस आंदोलन को कुचल देगी।
उन्होंने कहा, "जब मैं अपने गांव अंतरवली में आंदोलन कर रहा था, तब महिलाओं और बुजुर्गों पर भी जानलेवा हमला किया गया था। सरकार ने हम पर गोलियां तक चलवाई थीं। मैं सभी छात्रों से कहना चाहता हूं कि यह जगह मत छोड़िए। पूरा देश आपके साथ खड़ा है। अगर आप यहां से हट गए तो यह आंदोलन खत्म कर दिया जाएगा। हमने साबित किया है कि शांतिपूर्ण आंदोलन में कितनी ताकत होती है।"
मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार जनता के वोट से बनी है और वही आज छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा, "सरकार को हमने चुना है। हमारे माता-पिता, गांव, जिले और राज्य के लोगों ने इन्हें वोट दिया है, लेकिन आज यही सरकार छात्रों पर अत्याचार कर रही है। छात्रों और गरीब लोगों में इतनी ताकत है कि वे सरकार को सत्ता से बाहर कर सकते हैं। अगर आगे किसी भी तरह की परेशानी आई तो हम सभी आपके साथ खड़े रहेंगे। पूरा महाराष्ट्र और पूरा देश आपके समर्थन में है।"
मनोज जरांगे ने जंतर-मंतर पर मराठी भाषा में अपना संबोधन दिया। वहां मौजूद अन्य राज्यों के लोगों तक उनका संदेश पहुंचाने के लिए अभिजीत दीपके ने उनके भाषण का हिंदी में अनुवाद किया। दीपके ने कहा, "शायद आप इन्हें नहीं जानते होंगे, पर यह बहुत बड़ी ताकत हैं, आप इंटरनेट पर इनके बारे में जान सकते हैं।“
अभिजीत दीपके ने बताया कि मनोज जरांगे ने एक वीडियो देखा था, जिसमें एक छात्रा रो रही थी और आसपास छात्रों पर लाठियां बरस रही थी। वह वीडियो देखने के बाद ही उन्होंने दिल्ली आने का फैसला किया। उनके आने से आज आंदोलन को बड़ी ताकत मिली है।"
मंच से उतरने के बाद मीडिया से बातचीत में मनोज जरांगे ने कहा कि जब गरीब और आम छात्रों पर अन्याय होता है तो देश की राजधानी में आकर आवाज उठाना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा, "दिल्ली देश की राजधानी है। जब हमारे साथ अन्याय होता है तो हमें यहीं आना पड़ता है। सरकार ने छात्रों पर क्रूरता दिखाई है। अगर शांतिपूर्ण आंदोलन को जबरन कुचलने की कोशिश की गई तो हम इसका विरोध करेंगे।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस शांतिपूर्ण आंदोलन में बाधा डालने की कोई कोशिश की गई, तो वे इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कहीं भी आजादी से घूमने नहीं देंगे।