
NEET-UG 2024 विवाद के बाद परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने और सुधार करने के लिए पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अगुवाई में एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी की रिपोर्ट आए करीब दो साल हो चुके हैं। सरकार ने समिति के सुझावों को मान तो लिया था, लेकिन जमीन पर ये पूरी तरह नहीं उतर पाए हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी ने कुल 101 सुझाव दिए थे, जिनमें से अब तक केवल 57 (56.4%) को ही पूरी तरह लागू किया गया है। वहीं 10 सुझावों पर आधा-अधूरी कार्रवाई हुई है, जबकि 27 प्रस्तावों पर अभी तक कोई काम शुरू ही नहीं हो पाया है।
कमेटी की रिपोर्ट के बाद सबसे पहला बदलाव जनवरी 2025 में आयोजित JEE (Main) परीक्षा में देखने को मिला था। इस परीक्षा में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। जिसमें उम्मीदवारों का पहचान सत्यापन, सख्त चेकिंग, बायो-ब्रेक (टॉयलेट ब्रेक) के बाद दोबारा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जैसी कड़ी प्रक्रियाएं शामिल थी।
इसके अलावा, हाल ही में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और टेस्ट सेंटर ऑपरेशन जैसे विभागों के लिए एक्सपर्ट्स की भर्तियां निकाली गई हैं, ताकि आउटसोर्सिंग स्टाफ पर निर्भरता कम हो सके।
राधाकृष्णन समिति की सबसे बड़ी और प्रमुख सिफारिश यह थी कि NTA को केवल प्रवेश परीक्षाएं (Entrance Exams) आयोजित करनी चाहिए, ताकि एजेंसी अपना पूरी ध्यान पेपर लीक रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में कर सके। समिति ने साफ कहा था कि NTA को सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाएं (Recruitment Exams) कराने के काम से पूरी तरह अलग कर दिया जाए।
दिसंबर 2024 में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी घोषणा की थी कि वर्ष 2025 से NTA कोई भर्ती परीक्षा नहीं कराएगा। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर NTA लगातार भर्ती परीक्षाएं आयोजित कर रहा है। एजेंसी ने जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश सिविल कोर्ट स्टाफ भर्ती परीक्षा आयोजित की। इसके बाद मार्च और मई 2025 में गुजरात हाईकोर्ट और जिला अदालतों की भर्ती के स्टेज-II की परीक्षाएं कराई गई। हद तो तब हो गई जब साल 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मार्च और जून में नए विज्ञापनों के जरिए निजी सचिव और रिव्यू ऑफिसर जैसे पदों की भर्ती की जिम्मेदारी फिर से NTA को सौंप दी। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि अगर NTA इसी तरह दूसरी एजेंसियों की भर्ती परीक्षाओं में उलझा रहेगा, तो तो सुधार करने का असली मकसद ही खत्म हो जाएगा। वर्तमान में NTA के पास केवल 24 स्थायी कर्मचारी हैं, जबकि 73 संविदा और 124 आउटसोर्स कर्मचारी हैं, जो कार्यभार के मुकाबले बहुत कम हैं।
कमेटी की जिन 27 सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है, उनमें छात्रों की मदद और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े डिजिटल बदलाव शामिल हैं। सरकार ने हवाई अड्डों पर चलने वाली 'डिजी यात्रा' की तर्ज पर एक डिजिटल पहचान सत्यापन प्रणाली 'DIGI-EXAM' बनाने का प्रस्ताव रखा था, जो अब तक फाइलों से बाहर नहीं आ सका है। इसके साथ ही इंटरनेट और कंप्यूटर की मदद से सुरक्षित तरीके से पेपर बांटने और ग्रामीण इलाकों के बच्चों के लिए गाड़ियों में चलती-फिरती परीक्षा लैब यानी मोबाइल टेस्टिंग सेंटर बनाने की योजना भी लटकी हुई है। छात्रों का मानसिक तनाव कम करने के लिए कोचिंग संस्थानों की निगरानी व्यवस्था तैयार करने की बात कही गई थी, लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं NEET-UG परीक्षा को आने वाले समय में पूरी तरह कंप्यूटर आधारित करने और इसे कई चरणों (Multi-Session) में कराने की घोषणा तो हुई है, लेकिन अभी तक भी इसका क्रियान्वयन बाकी है।
समिति ने सुधारों को दो हिस्सों में बांटा था- तुरंत होने वाले सुधार (शॉर्ट टर्म) और लंबे समय में होने वाले बड़े बदलाव (लॉन्ग टर्म)। पहले चरण की 60 तुरंत लागू होने वाली सिफारिशों में से 46 को लागू कर दिया गया है, जिसके तहत साल 2025 में CUET परीक्षा के विषयों की संख्या 63 से घटाकर 37 की गई थी। इसके उलट, दूसरे चरण के बड़े बदलावों की रफ्तार बहुत धीमी रही है। इस चरण के 41 बड़े ढांचागत सुधारों में से केवल 11 को ही लागू किया जा सका है, जबकि 21 सिफारिशें अभी भी लंबित पड़ी है।