
Neha Bora hunger strike Jantar Mantar: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही महीने भर से जारी विरोध प्रदर्शन भले ही फिलहाल थम गया हो, लेकिन इस आंदोलन ने कई युवा चेहरों को राष्ट्रीय पहचान दी है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में चले इस आंदोलन में अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जेएनयू (JNU) की शोधार्थी नेहा बोरा एक प्रमुख और असरदार आवाज बनकर उभरीं।
25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल बन गया। इस दौरान नेहा बोरा और उनके साथी छात्र 'दिल से' फिल्म के गानों पर झूमते नजर आए। जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए नेहा ने मशहूर क्रांतिकारी कार्यकर्ता एम्मा गोल्डमैन (1869-1940) के विचार को कोट करते हुए लिखा कि 'अगर मैं नाच नहीं सकती, तो यह मेरी क्रांति नहीं होगी!'
उत्तराखंड में पली-बढ़ीं, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और अंबेडकर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर करने वाली नेहा बोरा जेएनयू के 'स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स' से पीएचडी स्कॉलर हैं। वह एक रंगकर्मी भी हैं। जंतर-मंतर पर मुख्य मंच से अलग एआईएसए के बैनर तले अनशन पर बैठीं नेहा ने 23 दिनों तक भूख हड़ताल की, जिस दौरान उनका वजन लगभग 7.5 किलो घट गया और ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक रूप से नीचे गिर गया।
इस कठिन अनशन के बीच भी नेहा ने जेन-ज़ी (Gen-Z) अंदाज में अपने इंस्टाग्राम रील्स के जरिए तीखा 'डार्क ह्यूमर' जारी रखा। एक चर्चित रील में उन्होंने कहा था कि 'चलो भूख की बात करते हैं क्योंकि अभी मेरे दिमाग में वही चल रहा है।' इसके साथ ही उन्होंने अपनी भोजन की भूख की तुलना केंद्र सरकार की 'सत्ता की भूख' से की थी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और आंदोलन के समापन से ठीक कुछ घंटे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान राहुल गांधी के साथ मंच पर तीन युवा महिला कार्यकर्ता मौजूद थीं, जिनमें नेहा बोरा, दानिश अली और अंजलि शामिल थीं।