
Protest Jantar Mantar: राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का नाम सुनते ही दिमाग में जोश से भरी भीड़, नारे बड़े-बड़े बैनर, और लाउडस्पीकर इन सबका ख्याल आने लगता है, लेकिन देश की राजधानी के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक ऐसा अनोखा और अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जिसने पारंपरिक विरोध प्रदर्शनों की परिभाषा ही बदल दी। दरअसल, जो सिलसिला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर महज एक हल्के-फुल्के मजाक और मीम के रूप में शुरू हुआ था, वह देखते ही देखते जंतर-मंतर पर युवाओं के एक विशाल और जीवंत हुजूम में तब्दील हो गया।
आपको बता दें कि इस अनोखे प्रदर्शन में न नारेबाजी थी और न ही कोई हंगामा। फुटपाथों पर कुछ पर्चे और कॉकरोच के मास्क जरूर दिखाई दिए, लेकिन सबसे ज्यादा नजर आ रही थीं किताबें, ताजे फूल और लहराता हुआ तिरंगा। आंदोलन के आयोजकों ने पहले ही अपने डिजिटल निमंत्रण में इसकी शांतिपूर्ण रूपरेखा तय कर दी थी। प्रतिभागियों से अपील की गई थी कि वे जंतर-मंतर पर एक किताब और तिरंगा लेकर आएं तथा करुणा और कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में वहां तैनात पुलिसकर्मियों को फूल भेंट करें। संदेश साफ था कि इस आंदोलन को पूरी तरह प्रेम, शालीनता और अहिंसा के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
जंतर-मंतर पर हुए इस अनोखे प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत उसका व्यंग्य और हास्य से भरा अंदाज रहा, जिसने बड़ी संख्या में युवाओं को आकर्षित किया। प्रदर्शन में शामिल लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा निहारिका सिंह ने कहा कि उनके हाथ में मौजूद गुलाब शांतिपूर्ण विरोध और जवाबदेही की मांग का प्रतीक है। उनका मानना है कि यह आंदोलन दिखाता है कि बिना नफरत और हिंसा के भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है। वहीं फरीदाबाद से आई फॉरेंसिक साइंस की छात्रा समीक्षा ने कहा कि आज की जेन-जी पीढ़ी सोशल मीडिया की ताकत से किसी भी मुद्दे पर लोगों को एकजुट कर सकती है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट ने युवाओं को अपनी आवाज बुलंद करने का मंच दिया है और इसी वजह से यह आंदोलन ऑनलाइन दुनिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच सका।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों की कहानियां उनके संघर्ष और संकल्प को भी बयां कर रही थीं। दरअसल, फॉरेंसिक साइंस की छात्रा समीक्षा ने बताया कि उन्होंने नीट की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत की, कई बार 20-20 घंटे के लाइव स्टडी सेशन तक अटेंड किए। उनका कहना था कि छात्र इन परीक्षाओं के लिए अपनी जिंदगी के कई अहम साल दांव पर लगा देते हैं। समीक्षा ने बताया कि उनके माता-पिता इस प्रदर्शन में शामिल होने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मेरी शिक्षा और भविष्य का सवाल है, इसके लिए मैं खुद लड़ सकती हूं। जंतर-मंतर पर किताबों, फूलों और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले इस अनोखे विरोध ने देशभर का ध्यान खींचा है। युवाओं का मानना है कि अपनी आवाज बुलंद करने के लिए शोर-शराबे की नहीं, बल्कि रचनात्मक सोच और एकजुटता की जरूरत होती है।