
Bihar News: पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने विपक्ष के नेताओं और उनके विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शांति से बैठकर लोगों से नहीं मिल सकते, सांसद और विधायक आपस में बात नहीं कर सकते और अपनी बात रखने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी नहीं कर सकते, तो फिर लोकतंत्र में क्या रह जाएगा?
पप्पू यादव ने कहा कि विपक्ष का काम सिर्फ संसद में बैठना नहीं है। जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना और सरकार तक अपनी बात पहुंचाना भी उसकी जिम्मेदारी है। ऐसे में अगर शांतिपूर्वक विरोध करने पर भी रोक लगती है, तो विपक्ष अपनी बात आखिर किस तरह रखेगा?
पप्पू यादव ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट की ओर से कही गई बात का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि जब अदालत इस मामले में अपनी बात कह चुकी है, तो क्या इसके बाद भी जिम्मेदार लोगों को अपने पद पर बने रहना चाहिए?
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किसी मामले में कार्रवाई के बाद कोई जिम्मेदार व्यक्ति यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है कि उसे इसकी जानकारी नहीं थी या उसने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था?
सांसद ने कहा कि किसी भी मामले में सिर्फ आदेश देने वाले व्यक्ति को देखना ही काफी नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि पूरी कार्रवाई किस तरह हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
पप्पू यादव ने कहा कि जब किसी मामले में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सिर्फ यह कह देना कि मुझे इसकी जानकारी नहीं थी, इससे मामला खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी फैसले या कार्रवाई से लोगों को परेशानी हुई है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
अपने बयान के दौरान पप्पू यादव ने कंपनियों से जुड़े कथित मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब किसी कंपनी में गड़बड़ी सामने आती है तो सिर्फ एक व्यक्ति की भूमिका नहीं देखी जाती, बल्कि ऊपर से नीचे तक जिम्मेदारी तय करने की बात होती है।
पप्पू यादव का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति की भी जगह होनी चाहिए। सांसद, विधायक और विपक्षी नेता अगर किसी मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें शांतिपूर्वक अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर विपक्ष के प्रदर्शन, नेताओं के अधिकार और जिम्मेदारी तय करने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।