नई दिल्ली

Parliament Breach Case: दिल्ली पुलिस ने की 14,000 पेज की चार्जशीट दर्ज, आरोपियों पर UAPA का शिकंजा

Parliament Smoke Case: संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में दिल्ली पुलिस ने 14,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। आरोपियों पर UAPA समेत कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी।
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Parliament Breach Case
दिल्ली पुलिस ने 2023 के संसद उल्लंघन मामले में 14 हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की (Photo-IANS)

Parliament Breach Case: नई दिल्ली में साल 2023 के संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले की जांच एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। इस मामले में अब दिल्ली पुलिस ने लगभग 14 हजार पेज की चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इस चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 मई तय की है। पुलिस का कहना है कि इस नई चार्जशीट में नए सबूत, मोबाइल और डिजिटल डेटा समेत कई जरूरी जानकारियां शामिल हैं।

संसद सुरक्षा उल्लंघन केस में नई चार्जशीट

दिल्ली पुलसि की इस चार्जशीट में आरोपियों पर IPC की 186, 353, 153, 452, 201, 34 and 120B धारा के साथ UAPA की गंभीर धाराएं भी लगाई गई हैं। सुनवाई के दौरान नीलम आजाद और महेश कुमावत जमानत पर कोर्ट पहुंचे और मनोरंजन डी., अमोल, सागर शर्मा और ललित झा को जेल से अदालत लाया गया। जांच टीम ने चार्जशीट कोर्ट में जमा की और इसकी कॉपी आरोपियों और उनके वकीलों को पेन ड्राइव के जरिए दी गई।

आरोपियों ने चार्जशीट पर जताई आपत्ति

इस मामले में आरोपी आरोपी आजाद और अमोल धनराज की ओर से पेश वकीलों ने इस चार्जषीट के दाखिल किए जाने र आपत्ति जताई। उनका पक्ष था कि इस मामले में आरोपोंको लेकर पहले से ही इतनी लंबी बहस चल रही है और ऐसे में फिर से चार्जशीट दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग हुआ। बचाव पक्ष ने चार्जशीट की हार्ड कॉपी भी मांगी। इस पर अभियोजन पक्ष ने सुनवाई की अगली तारीख को देने की बात कही।

2023 संसद घटना

यह पूरा मामला 13 दिसंबर 2023 का है, जब संसद के अंदर और बाहर सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक हुई थी।

उस दिन जब लोकसभा की मीटिंग चल रही थी, तभी सागर शर्मा और मनोरंजन डी. नाम के दो लड़के दर्शकों की गैलरी से नीचे कूद गए। उन्होंने वहां पीले रंग का धुआं फैला दिया, जिससे पूरी संसद में हड़कंप मच गया था। ठीक उसी समय, संसद भवन के बाहर नीलम आजाद और अमोल नाम के दो लोगों ने रंग-बिरंगा धुआं उड़ाया और जमकर नारेबाजी की। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरी प्लानिंग के पीछे असली दिमाग ललित झा का था। घटना के बाद उसने सबूत मिटाने के लिए अपने बाकी साथियों के मोबाइल फोन भी छिपा दिए थे।

Updated on:
23 May 2026 02:54 pm
Published on:
23 May 2026 02:54 pm