Pregnancy : महिला चिकित्सक पर दिल्ली की एक उपभोक्ता अदालत ने 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
Pregnancy दिल्ली के एक नामी अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने उजागर हुई है। प्रेग्नेंसी किट लेकर अस्पताल पहुंची महिला को डॉक्टर ने ऐसी दवाई दे डाली कि अब जीवन में यह महिला कभी भी मां नहीं बन सकेगी। जब महिला को इस बात का पता चला तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने इस पूरे मामले में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही उजागर होने पर अस्पताल पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
दिल्ली के दरियागंज स्थित एक अस्पताल में 40 वर्षीय महिला प्रेग्नेंसी किट लेकर पहुंची थी। अस्पताल की महिला चिकित्सक ने बिना अल्ट्रासाउंड किए इसी जांच को पर्याप्त मान लिया और महिला को प्रेग्नेंसी किट के आधार पर दवा दे दी। सिर्फ दवा ही नहीं दी बल्कि इंजेक्शन भी लगा दिए। इसके बाद महिला को छुट्टी दे दी गई। इस घटना के कुछ ही समय बाद महिला के पेट में दर्द हुआ तो उसने दूसरे डॉक्टर से सलाह ली। अल्ट्रासाउंड करने पर पता चला कि महिला को एक्टोपिक प्रेग्रेंसी थी। चिकित्सक ने बिना अल्ट्रासाउंड किए ही प्रेग्नेंसी को खत्म करने की दवा दे दी थी। इससे जो भ्रूण था वो नले में फंस रह गया और उसकी मौत भी हो गई। बच्चे की मौत हो जाने पर ही महिला के पेट में दर्द हुआ था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चिकित्सकों ने महिला को जो दवाइयां खिलाई उनसे गर्भ धारण के लिए महिला के महत्वपूर्ण अंग फैलोपियन ट्यूब को भारी नुकसान हुआ। बाद में चिकित्सकों को ऑपरेट करके इस फैलोपियन ट्यूब को निकालना पड़ा। महिला समरीन ने ऑपरेशन के बाद डॉक्टर कुलजीत के खिलाफ केस फाइल किया। जिला उपभोक्ता आयोग ने पत्रावली पर आए साक्ष्य और इस पूरे मामले में दोनों ओर से हुई बस के बाद माना कि इस पूरे प्रकरण में डॉक्टर की लापरवाही है। महिला एक ''हाई रिस्क प्रेग्नेंसी'' का सामना कर रही थी और डॉक्टर बिना आवश्यक जांच किए ही एक प्रेग्नेंसी किट के आधार पर इलाज शुरू कर दिया और इतनी दवाएं दे डाली कि महिला को अब जीवन भर मां बनने से वंछित रह जाएगी।
इस मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने महिला चिकित्सक पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने कहा है कि भले ही महिला को 20 लाख रुपये हर्जाने के रूप में दिए जा रहे हों लेकिन चिकित्सक की लापरवाही से जो नुकसान महिला को हुआ है वह भावनात्मक नुकसान है जिसकी भरपााई जीवनभर भी नहीं की जा सकती लेकिन फिलहाल चिकित्सक पर आयोग ने 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।