नई दिल्ली

राहुल गांधी ने कांग्रेस छोड़ने वालों को बताया ‘कायर’, तो खरगे बोले- वे सब आपके ही दोस्त थे

Mallikarjun Kharge: राहुल गांधी ने कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं को कायर और लालची बताया तो मल्लिकार्जुन खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि वे सभी राहुल के दोस्त थे। जानिए दोनों के बीच बातचीत में क्या हुआ।
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Rahul Gandhi
राहुल गांधी के बयान पर मल्लिकार्जुन खरगे का तंज (फोटो सोर्स- IANS)

Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत के दौरान पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कायरों और लालचियों के जाने के बाद अब कांग्रेस में सिर्फ शेर बचे हैं। इस पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुटकी लेते हुए कहा कि पार्टी छोड़कर जाने वाले सभी नेता राहुल गांधी के दोस्त थे। इस बातचीत में राहुल ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया और राजनीति में दोस्ती को लेकर अपना नजरिया बताया।

'कायर गए, अब सिर्फ शेर बचे हैं'

बैठक के दौरान राहुल गांधी ने हाल के वर्षों में पार्टी का साथ छोड़ने वाले नेताओं पर बात की। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और गुलाम नबी आजाद का नाम लेते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि जो लोग लालची या डरपोक थे, वे पार्टी छोड़कर चले गए। राहुल का कहना था कि कुछ नेता सुख-सुविधाओं और सुरक्षा के चक्कर में गए, तो कुछ ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) के डर से भाजपा में शामिल हो गए। राहुल ने कहा, 'कायरों और लालचियों के जाने के बाद अब कांग्रेस में सिर्फ 'शेर' बचे हैं।'

खरगे का तंज- 'वे तो आपके दोस्त थे'

राहुल गांधी के इस बयान पर पास ही बैठे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी लेते हुए कहा, 'लेकिन वे सब तो आपके ही दोस्त थे।' खरगे के इस अचानक दिए गए जवाब से माहौल खुशनुमा हो गया, हालांकि राहुल गांधी थोड़े असहज जरूर दिखे। राहुल ने तुरंत अपनी बात संभालते हुए पास बैठी प्रियंका गांधी की तरफ इशारा किया और कहा कि मेरी बहन यहीं बैठी हैं, इन्हें मालूम है कि सिंधिया मेरे दोस्त नहीं थे।

दादी इंदिरा गांधी का किस्सा सुनाया

बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने राजनीति में रिश्तों की सच्चाई पर पूर्व प्रधानमंत्री और अपनी दादी इंदिरा गांधी से जुड़ा एक पुराना किस्सा साझा किया। राहुल ने बताया कि मैंने एक बार अपनी दादी से पूछा था कि उनकी सबसे अच्छी दोस्त कौन है? दादी ने जवाब दिया था कि उनका कोई सबसे अच्छा दोस्त नहीं है। जब मैंने घर आने-जाने वाली एक महिला का नाम लिया, तो दादी ने समझाया कि हो सकता है मैं उसकी सबसे अच्छी दोस्त होऊं, लेकिन वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त नहीं है।
राहुल गांधी ने खरगे की तरफ देखते हुए कहा कि राजनीति में जो दोस्त दिखता है, जरूरी नहीं कि वह सच में दोस्त हो। इसलिए यह पहचानना बहुत मुश्किल है कि उनके असली दोस्त कौन हैं।

खरगे के प्रति जताया सम्मान

बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को मल्लिकार्जुन खरगे के राजनीतिक जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दो बार मुख्यमंत्री बनने का मौका चूकने के बावजूद खरगे ने कभी अपनी विचारधारा और पार्टी से समझौता नहीं किया। राहुल ने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए दावा किया कि मौजूदा सरकार के पास अब बहुत कम समय बचा है, इसलिए संघर्ष और विरोध-प्रदर्शन को अपने प्रशिक्षण का हिस्सा बनाकर काम करते रहें।

Updated on:
16 Oct 2026 10:15 am
Published on:
16 Oct 2026 09:52 am