Delhi High Court: अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की धमकियों के साए में नहीं जीना चाहिए, और ऐसे मामलों में पुलिस को तत्काल और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
Delhi High Court: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री से रंगदारी और जान से मारने की धमकी मिलने का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। अदालत ने इस गंभीर प्रकरण में दिल्ली पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह खत्री की सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाए। इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि एक बीट कॉन्स्टेबल दो सप्ताह तक हर रोज रौनक खत्री के घर जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछेगा। इसके साथ ही पुलिस स्पेशल सेल खतरे का आकलन कर खत्री को उचित सुरक्षा मुहैया कराए। दिल्ली हाईकोर्ट ने नागरिकों की सुरक्षा को राज्य का महत्वपूर्ण दायित्व बताया।
मामला तब सामने आया जब रौनक खत्री ने बताया कि उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से फिरौती की धमकी दी गई है। खत्री के अनुसार, 29 सितंबर को उन्हें यूक्रेन के एक नंबर से व्हॉट्सएप पर संदेश प्राप्त हुए, जिनमें खुद को कुख्यात अपराधी रोहित गोडारा बताने वाले व्यक्ति ने उनसे 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। धमकी देने वाले ने संदेश में यह भी लिखा कि यदि मांगी गई रकम नहीं दी गई तो खत्री को गोली मार दी जाएगी। इन संदेशों के बाद खत्री ने तुरंत दिल्ली पुलिस को शिकायत दी और अपनी सुरक्षा की मांग की।
इस मामले में खत्री की ओर से वकील ओभिरुप घोष, निशांत खत्री, तेजस्विनी और शौर्य विक्रम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि उन्हें निरंतर धमकियां मिल रही हैं और जान का खतरा बना हुआ है, लेकिन पुलिस की ओर से अब तक सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है। गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि रौनक खत्री की सुरक्षा मांग पर “तुरंत कार्रवाई” की जाए। अदालत ने अंतरिम आदेश में यह भी कहा कि अगले दो सप्ताह तक पुलिस का एक बीट कॉन्स्टेबल प्रतिदिन कम से कम एक बार खत्री के घर जाकर उनकी कुशलक्षेम की जांच करेगा और सुरक्षा की स्थिति पर नजर रखेगा।
दिल्ली पुलिस की ओर से स्थायी वकील संजय लाओ ने अदालत को बताया कि खत्री द्वारा दी गई शिकायत और सुरक्षा की मांग को डीसीपी स्पेशल सेल को भेजा गया है। यह सेल खतरे के स्तर का आकलन करेगी और उसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक एक स्थानीय बीट कॉन्स्टेबल को प्रतिदिन रौनक खत्री के आवास पर भेजा जाएगा ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। संजय लाओ ने अदालत को बताया कि खत्री की फाइल को डीसीपी आउटर नॉर्थ के माध्यम से आगे स्पेशल सेल को भेजा जा रहा है ताकि मामले की गंभीरता के अनुसार निर्णय लिया जा सके।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि खतरा वास्तविक और गंभीर पाया जाता है, तो याचिकाकर्ता को आवश्यक पुलिस सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका का निपटारा किया कि राज्य का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह प्रत्येक नागरिक के जीवन और सुरक्षा की रक्षा करे। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की धमकियों के साए में नहीं जीना चाहिए, और ऐसे मामलों में पुलिस को तत्काल और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। फिलहाल, दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है और खत्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक कदम उठाए जा चुके हैं।