नई दिल्ली

‘भारत बांग्लादेश नहीं, यहां जनता की चलेगी’, सचिन पायलट ने नेहा बोरा की बात से जताई असहमति

Sachin Pilot: सचिन पायलट ने बांग्लादेश से भारत की तुलना खारिज करते हुए कहा कि देश में राजनीतिक बदलाव जनता की इच्छा और चुनावों से होना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई, राहुल गांधी के खिलाफ आरोपों और लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी बात रखी।
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Updated: 31 Oct 2026, 1:12 PM IST
Sachin Pilot
पंजाब कांग्रेस इंचार्ज सचिन पायलट (इमेज सोर्स-ANI)

Neha Bora: कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भारत में लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के अधिकार का बचाव करते हुए बांग्लादेश से की जा रही तुलना को खारिज कर दिया। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोग आतंकवादी या देशद्रोही थे? पायलट ने साफ कहा कि कांग्रेस दबाव, धमकियों और सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई से पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और उसके फैसलों की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है।

बांग्लादेश जैसी स्थिति की तुलना को किया पूरी तरह खारिज

पायलट से जब यह सवाल किया गया कि क्या भारत में भी बांग्लादेश की तर्ज पर अराजक प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं, तो उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक शांतिपूर्ण लोकतंत्र है। जो भी होना है, वह जनता की इच्छा से हुआ है और आगे भी होना चाहिए। जनता की यह इच्छा चुनावों के जरिए सामने आती है और चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शी होने चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि देश चलाने वाले लोगों के लिए संविधान सबसे ऊपर है और पिछले 75 सालों में सरकार में जो भी बदलाव हुए हैं, वे हमेशा जनता के जनादेश यानी चुनावों के माध्यम से ही हुए हैं।

बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से नेहा बोरा ने ली क्रांति की प्रेरणा

नेहा बोरा ने 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए भेजे गए अपने संदेश में बांग्लादेश के छात्र आंदोलन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हुए आंदोलन ने उन्हें क्रांति की राह दिखाई है। नेहा ने इस आंदोलन से प्रेरणा लेने के साथ ही उसके अनुभवों से सीखने की जरूरत पर भी जोर दिया।

'दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर क्यों की गई कार्रवाई?'

राजधानी दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों और पुलिस कार्रवाई पर सचिन पायलट ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र किसी राजनीतिक पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे देश के होते हैं। पायलट ने आरोप लगाया कि जब युवाओं ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई तो उन पर लाठियां और पैलेट गन चलाई गईं, उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए और उनके बैंक खाते तक जब्त कर लिए गए। उन्होंने सवाल किया कि पूरे शहर को छावनी में बदलने की जरूरत क्यों पड़ी और क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोग आतंकवादी या देशद्रोही थे?

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित अन्य कांग्रेस नेताओं को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से मिलने के दौरान बसों में घसीटकर ले जाने की घटना पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। पायलट ने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत बताया। 'कांग्रेस हिंसा का समर्थन नहीं करती' पायलट ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करती और कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा, 'हमारे देश में हिंसा की कोई जगह नहीं है… चाहे सरकार कितना भी दबाव बनाए, सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल करे या धमकियां दे, हम अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। लोकतंत्र में हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।'

मल्लिकार्जुन खरगे के बयान और राजनीतिक मर्यादा पर विचार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयानों को लेकर चल रही बहस पर भी पायलट ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खरगे देश में एक ही विचारधारा को थोपे जाने की प्रवृत्ति को लेकर चिंता जता रहे थे। साथ ही, उन्होंने यह भी माना कि सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक बहसों में एक मर्यादा जरूर होनी चाहिए और असंसदीय भाषा से बचना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि विपक्ष का काम सरकार से तीखे सवाल पूछना और नीतियों की आलोचना करना है। पायलट ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी मर्यादा की सीमा पार नहीं की है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष कोई गंभीर मुद्दा उठाता है, तो सरकार को नाराजगी जताने के बजाय तथ्यों, आंकड़ों और स्वस्थ बहस के साथ जवाब देना चाहिए।

Updated on:
31 Oct 2026, 1:12 PM IST
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