
RSS Ban 1948: सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक ऐसी पुरानी घटना का जिक्र किया है, जो आज भी देश की राजनीति में चर्चा का विषय बनी रहती है। उन्होंने सरदार पटेल को याद करते हुए महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लगाए गए प्रतिबंध की बात उठाई। खेड़ा की इस पोस्ट में पटेल के देश के लिए किए गए कामों के साथ उनके गृह मंत्री रहते लिए गए एक बड़े फैसले का भी जिक्र है।
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर लिखी अपनी पोस्ट में सरदार पटेल को महात्मा गांधी का पक्का अनुयायी और आजादी की लड़ाई का बड़ा नेता बताया। उन्होंने कहा कि देश को एकजुट करने और आज के भारत को बनाने में पटेल का बहुत बड़ा योगदान रहा। खेड़ा के मुताबिक, कांग्रेस के इस नेता ने अपने काम और फैसलों से देश को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई थी।
पवन खेड़ा ने अपनी पोस्ट में खास तौर पर उस फैसले को याद किया, जब सरदार पटेल देश के गृह मंत्री थे और RSS पर प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने लिखा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद पटेल ने संगठन पर रोक लगाई थी। खेड़ा ने RSS के लिए कड़ी टिप्पणी करते हुए इस फैसले को अपनी पोस्ट का अहम हिस्सा बनाया।
दरअसल, 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ दिन बाद, 4 फरवरी 1948 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया। उस समय सरदार पटेल देश के गृह मंत्री थे। सरकार ने संगठन की गतिविधियों को देश की सुरक्षा और शांति के लिए खतरा बताते हुए यह कदम उठाया था।
इस प्रतिबंध के बाद RSS की ओर से सरकार के साथ बातचीत और संगठन के कामकाज को लेकर कुछ शर्तें तय हुईं। इसके बाद जुलाई 1949 में सरकार ने प्रतिबंध हटा लिया। यानी करीब डेढ़ साल तक संगठन पर रोक लगी रही।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि RSS पर प्रतिबंध सरदार वल्लभभाई पटेल ने ही लगाया था। उन्होंने RSS के लोगों से कहा कि वे पहले यह समझें कि उस समय संगठन पर रोक क्यों लगाई गई थी। अधीर रंजन ने कहा कि RSS को सरदार पटेल के कामों से सीख लेनी चाहिए और देश में नफरत फैलाने वाली राजनीति से बचना चाहिए।
सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे। 1947 में आजादी मिलने के समय भारत में सैकड़ों छोटी-बड़ी रियासतें थीं। इन रियासतों को भारत में शामिल करना आसान काम नहीं था। पटेल ने अपनी सूझबूझ और बातचीत के जरिए ज्यादातर रियासतों को भारत के साथ जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। इसी वजह से उन्हें 'लौह पुरुष' कहा जाता है।
हर साल 31 अक्टूबर को उनकी जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस साल उनकी 151वीं जयंती पर पवन खेड़ा ने उन्हें याद करते हुए कहा कि देश को जोड़ने के लिए पटेल ने जो काम किया, वह हमेशा लोगों को प्रेरित करता रहेगा।
इस तरह खेड़ा की पोस्ट में सरदार पटेल के योगदान को याद करने के साथ उनके उस फैसले को भी सामने रखा गया, जो आजादी के बाद के शुरुआती राजनीतिक दौर की एक अहम घटना रहा है।