
Sudhanshu Trivedi press conference: भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोलते हुए उन्हें 'बिगड़ा हुआ शहजादा' करार दिया है। मंगलवार को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि होंगे राजे-राजकुमार, ये बिगड़े दिल शहजादे… जब भी सदन में प्रधानमंत्री या गृहमंत्री बोलने खड़े होते हैं, राहुल गांधी सदन छोड़कर भाग निकलते हैं। भाजपा सांसद का यह बयान राहुल गांधी के उस दावे के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके उठाए मुद्दों के आगे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अमित शाह संसद में टिक नहीं सकते।
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि गृहमंत्री अमित शाह हर मुद्दे पर बिंदुवार जवाब देने के लिए तत्पर हैं। ऐसे में विपक्ष के नेता को वाकआउट करने के बजाय अपनी जगह बैठकर पूरी बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनका अपना इतिहास ही संसद से गायब रहने का रहा हो, उन्हें दूसरों पर सवाल नहीं उठाने चाहिए। राहुल गांधी संसद सत्र के दौरान सदन से भागते हैं और सत्र खत्म होते ही विदेश भाग जाते हैं।
झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुद्दे पर बोलते हुए त्रिवेदी ने कहा कि जायज और गैर-राजनीतिक मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे युवाओं के साथ सरकार का रवैया अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कान पूरी तरह बंद हैं और उन्हें छात्रों की चीखें सुनाई नहीं दे रही हैं।
संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे या पूर्व में अधीर रंजन चौधरी, अरुण जेटली, सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के विपक्ष में रहते हुए भी कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी गई। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कभी यह कल्पना नहीं की होगी कि कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत अहंकार के कारण देश की शीर्ष पंचायत को इस तरह बाधित करेगा।
विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सरकार ने विपक्ष और छात्रों की कई मांगों को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि NEET परीक्षा के नियमों में बदलाव कर छात्रों की मांग के अनुरूप कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं। इसके अलावा, कैबिनेट ने नए विधेयक को मंजूरी दी है और प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी स्वीकार की गई है। त्रिवेदी ने कहा कि इन कदमों के बावजूद कांग्रेस और राहुल गांधी का रवैया यही दिखाता है कि वे संसद में किसी गंभीर और सार्थक बहस के पक्ष में नहीं हैं।