नई दिल्ली

कटिंग के दौरान बिगड़ा हेयर स्टाइल, 2 करोड़ मुआवजे की मांग…सुप्रीम कोर्ट ने 7 साल बाद खत्म किया विवाद

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सात साल पुराने एक चौंकाने वाले मामले का पटाक्षेप कर दिया है। दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में हेयरकट के दौरान महिला का हेयरस्टाइल बिगड़ने पर एनसीडीआरसी ने 2 करोड़ रुपये मुआवजे का आदेश दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पलटते हुए मामला खारिज कर दिया।

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Supreme Court: देश की सर्वोच्च न्यायालय ने एक सात साल पुराने ऐसे मामले का विवाद खत्म किया है, जो वाकई हैरान करने वाला है। दरअसल, दिल्ली के एक फाइव-स्टार होटल में बाल कटवाने गई महिला का हेयरस्टाइल बिगड़ गया था, जिसके बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उसे 2 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कड़ी फटकार लगाई और मामले को रद्द कर दिया।

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तफ्सील से जानिए मामला

आपको बता दें कि इस 'बाल कांड' की शुरुआत साल 2018 में हुई थी। आशना रॉय नाम की महिला अपना बाल कटवाने के लिए फाइव स्टार होटल में गई थी, लेकिन वहां पर बाल उसके मन मुताबिक नहीं कटा। महिला का आरोप है कि बाल काटने वाले ने पूरा हेयर स्टाइल ही बिगाड़ दिया, जिसकी वजह से उसकी खूबसूरती में कमी आ गई और उसका आत्मविश्वास कम हो गया। महिला का कहना है कि बाल बिगड़ने की वजह से उसे मॉडलिंग के कई बड़े प्रोजेक्ट्स नहीं मिल पाए, जिससे उसका भारी नुकसान हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने मॉडल को मुआवजे के तौर पर दो करोड़ रुपए देने के लिए कहा था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

Supreme Court ने रद्द किया मुआवजा

इस मामले को लेकर जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई तो कोर्ट ने NCDRC के फैसले को पलट दिया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच कर रही थी। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि केवल हेयर स्टाइल खराब होने से महिला का करियर बर्बाद हो गया या उन्हें फिल्मों और मॉडलिंग के काम नहीं मिला। इस आरोप का उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं है। इसलिए कोर्ट ने आशना रॉय को मिलने वाले 2 करोड़ रुपये के मुआवजे को तर्कहीन माना और उन्हें रद्द करने का आदेश दे दिया। इसके साथ कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मुआवजे की रकम ख्याली पुलाव के हिसाब से नहीं तय की जा सकती है।

कोर्ट ने लगाई फटकार

कोर्ट ने इस बात पर भी कड़ा ऐतराज जताया कि कथित नुकसान साबित करने के लिए मॉडल की ओर से केवल कुछ ई-मेल और कागजात की प्रतियां ही पेश की गई थीं। अदालत ने साफ कहा कि करोड़ों रुपये के मुआवजे की मांग के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी होते हैं; केवल फोटोकॉपी के आधार पर इतना बड़ा दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिन दस्तावेजों का हवाला दिया गया, वे या तो हेयरकट से काफी पहले के थे या काफी बाद के, जिनका इस घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं बनता।

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