OBC creamy layer: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि OBC क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, क्रीमी लेयर तय करते समय सामाजिक स्थिति, पद और अन्य मानकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
OBC creamy layer: देश की सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में क्रीमी लेयर तय करने के मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी उम्मीदवार को क्रीमी लेयर या नॉन-क्रीमी लेयर में शामिल करने का फैसला केवल उसकी आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ आय की सीमा को आधार बनाकर क्रीमी लेयर तय करना कानून की दृष्टि से सही नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि क्रीमी लेयर की पहचान करते समय केवल आय नहीं, बल्कि व्यक्ति के परिवार की सामाजिक स्थिति, पद और सेवा से जुड़े अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। अदालत के अनुसार, इन सभी मानकों को नजरअंदाज कर केवल आय के आधार पर किसी को क्रीमी लेयर घोषित करना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि क्रीमी लेयर की पहचान के लिए निर्धारित मानदंडों का संतुलित और व्यापक तरीके से पालन किया जाना चाहिए, ताकि सामाजिक और प्रशासनिक दोनों पहलुओं का सही आकलन हो सके। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी OBC आरक्षण से जुड़े मामलों में भविष्य के फैसलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भीतर आर्थिक और सामाजिक रूप से अपेक्षाकृत समृद्ध वर्ग को क्रीमी लेयर कहा जाता है। ऐसे परिवार, जिनकी आय अधिक है या जिनके माता-पिता उच्च सरकारी पदों या प्रभावशाली पेशों में हैं, उन्हें क्रीमी लेयर में रखा जाता है। सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुंचे। क्रीमी लेयर में आने वाले लोगों को OBC आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, जबकि नॉन-क्रीमी लेयर के उम्मीदवारों को इसका फायदा दिया जाता है।