नई दिल्ली

तिहाड़ से रिहाई के बाद खतरनाक साजिश! पाकिस्तान-बांग्लादेश में फिर सक्रिय हुए आतंकी…जांच एजेंसियां सतर्क

Delhi News: तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद कुछ पुराने आतंकी दोबारा सक्रिय हो गए हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इन आतंकियों ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अपना नेटवर्क फिर से खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी है।
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Terrorists re-activated in Pakistan and Bangladesh after release from Tihar Jail

Delhi News: तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद कुछ पुराने आतंकी फिर से सक्रिय होने की खबरों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद इन आतंकियों ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अपने नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि उनकी गतिविधियों पर भारतीय जांच एजेंसियां और खुफिया विभाग लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी संभावित साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।

बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर 9 मई 2002 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक गुप्त ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के तीन संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। केंद्रीय खुफिया एजेंसी से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मुंबई से आने वाली पंजाब मेल ट्रेन के यात्रियों पर नजर रखी और मौके पर तीन संदिग्धों सज्जाद, मेहराजुद्दीन और फिरोज को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से करीब 5 किलो आरडीएक्स, एक एके-47 राइफल, दो पिस्टल, डेटोनेटर, प्लास्टिक विस्फोटक और करीब 2 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।

पाकिस्तानी कमांडरों से मिलना था

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें लश्कर-ए-तैबा के दो पाकिस्तानी कमांडरों से मिलने के लिए भेजा गया था, जो Humayun's Tomb के पास मौजूद थे। इस जानकारी के बाद स्पेशल सेल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची, जहां एक मारुति कार में दो संदिग्ध आतंकी बैठे मिले। पुलिस और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में दोनों आतंकियों को मार गिराया गया। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों में सज्जाद की पहचान बाद में शेख सज्जाद गुल के रूप में हुई। अदालत में सुनवाई के बाद साल 2003 में उन्हें दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया गया और उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया। यह ऑपरेशन उस समय दिल्ली में संभावित बड़े आतंकी हमले को रोकने के लिहाज से बेहद अहम माना गया था।

पांच साल बाद हुआ एक खबर का खुलासा

TIO की रिपोर्ट के अनुसार, करीब पांच साल बाद इसी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा हुआ। जुलाई 2007 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने खुफिया इनपुट के आधार पर दिल्ली में शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया। एजेंसियों को सूचना मिली थी कि एक आतंकी राजधानी में भेजा गया है। गिरफ्तारी के समय उसके पास से ग्रेनेड, हथियार, गोला-बारूद, 280 डॉलर और करीब एक लाख रुपये नकद बरामद हुए। गिरफ्तारी के बाद उसे भी तिहाड़ में भेज दिया गया।न करीब एक दशक तक शेख सज्जाद गुल और शब्बीर लोन तिहाड़ जेल में बंद रहे। सजा पूरी होने के बाद वर्ष 2017 से 2019 के बीच दोनों को रिहा कर दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल से बाहर आने के कुछ समय बाद ही दोनों भारत छोड़कर फरार हो गए और विदेश में सक्रिय हो गए। बताया जाता है कि सज्जाद गुल पाकिस्तान पहुंच गया, जहां उसने बाद में टीआरएफ नामक संगठन की कमान संभाली, जिसे Lashkar-e-Taiba का प्रॉक्सी संगठन माना जाता है। उसके नेतृत्व में इस संगठन का नाम कई आतंकी घटनाओं से जोड़ा गया है।

पाकिस्तान से भेजा गया बांग्लादेश

वहीं शब्बीर लोन के बारे में सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह पाकिस्तान भाग गया और बाद में उसे Inter-Services Intelligence द्वारा बांग्लादेश भेजा गया, जहां उसे एक आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की जिम्मेदारी दी गई। हाल ही में उसके द्वारा भर्ती किए गए लोगों ने दिल्ली में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले भड़काऊ पोस्टर चिपकाकर 'टेस्ट टास्क' को अंजाम दिया, जिससे एजेंसियां सतर्क हो गईं। फिलहाल लोन बांग्लादेश में रहकर आईएसआई के समर्थन से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों को अंजाम देने की कोशिश कर रहा है।

Published on:
15 Mar 2026 02:12 pm