Rohini Court Judge Lawyer Fight: दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज राकेश कुमार-V और वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौच का मामला सामने आया है, जहां वकील ने जज को 'नशेड़ी' कह दिया। बार एसोसिएशन ने आपात बैठक बुलाकर दिल्ली हाईकोर्ट से कार्रवाई की मांग की है।
Courtroom Discipline Delhi: देश की राजधानी दिल्ली की रोहिणी कोर्ट (Rohini Court) से न्याय के मंदिर को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। अदालत में सुनवाई के दौरान एक अतिरिक्त जिला जज (ADJ) और वकीलों के बीच इस कदर 'तू-तड़ाक' और तीखी नोकझोंक हुई कि बात गाली-गलौच और हाथापाई तक पहुंच गई। बहस के दौरान गुस्से में आगबबूला हुए वकील ने कथित तौर पर जज को ‘नशेड़ी’ तक कह डाला। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब कानूनी जगत से लेकर आम जनता के बीच कोर्टरूम अनुशासन और न्यायिक मर्यादा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद रोहिणी कोर्ट में एक मामले की नियमित सुनवाई के दौरान शुरू हुआ। किसी कानूनी बिंदु पर बहस करते-करते जज और वकील दोनों ही अपना आपा खो बैठे। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस गाली-गलौच में बदल गई। स्थिति इस कदर बिगड़ गई कि दोनों के बीच हाथापाई होने ही वाली थी, लेकिन ऐन वक्त पर कोर्टरूम में मौजूद कर्मचारियों और अन्य वकीलों ने बीच-बचाव कर माहौल को किसी तरह शांत कराया। इस अप्रत्याशित घटना को देखकर अदालत कक्ष में मौजूद हर कोई दंग रह गया।
घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद दिल्ली की सभी जिला न्यायालय बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति (Coordination Committee) ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को समिति ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और घटना की कड़े शब्दों में निंदा की।
समिति ने एक आधिकारिक बयान जारी कर रोहिणी कोर्ट के उत्तर-पश्चिम जिला के न्यायिक अधिकारी (DJ-04) राकेश कुमार-V के व्यवहार को ‘अत्यंत आपत्तिजनक, अशोभनीय और पूरी तरह से अस्वीकार्य’ करार दिया। बार एसोसिएशन का आरोप है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और एक वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ जिस तरह का बर्ताव किया गया, वह न्यायपालिका की गरिमा के बिल्कुल खिलाफ था।
बैठक में सर्वसंमत्ति से प्रस्ताव पारित कर संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ तुरंत और दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। बार एसोसिएशन ने साफ शब्दों में कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और अदालतों की प्रतिष्ठा को बनाए रखना बेहद जरूरी है। ऐसा कोई भी व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, जिससे इस पवित्र संस्थान की साख को ठेस पहुंचे। इसके अलावा जिला अदालतों के कई वकीलों ने कुछ अन्य न्यायिक अधिकारियों के रवैये को लेकर भी शिकायतें की हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।
समिति ने अब इस गंभीर मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। बार ने अपील की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस संस्थागत और सुधारात्मक कदम उठाए जाएं ताकि अदालतों के भीतर आपसी सम्मान, पेशेवर माहौल और निष्पक्षता बनी रहे। इस घटना के बाद से फिलहाल बार और बेंच (न्यायपालिका) के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।