Harish Rana Case: इच्छामृत्यु की प्रक्रिया से गुजर रहे हरीश राणा के अंगदान के संकल्प को पूरा करने की तैयारी में जुटा एम्स (AIIMS)। डॉक्टरों की विशेष टीम अंगों की फिटनेस और प्रत्यारोपण की संभावनाओं की कर रही है गहन जांच, ताकि दूसरों को मिल सके नया जीवन।
Harish Rana Case: निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया से गुजर रहे गाजियाबाद के हरीश राणा के अंगदान के संकल्प को पूरा करने के लिए एम्स (AIIMS) की मेडिकल टीम ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके अंगों की विस्तृत चिकित्सीय जांच और स्कैनिंग कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कौन-कौन से अंग पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय हैं। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के बावजूद उनके कौन से अंग चिकित्सकीय रूप से प्रत्यारोपण (Transplant) के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि हरीश के कौन-कौन से अंग पूरी तरह क्रियाशील हैं और प्रत्यारोपण के मानकों पर खरे उतरते हैं। इस प्रक्रिया के उपरांत, आपसी सहमति और मेडिकल प्रोटोकॉल के आधार पर उन अंगों को उन गंभीर मरीजों में प्रत्यारोपित किया जाएगा, जिन्हें जीवन बचाने के लिए इनकी तत्काल आवश्यकता है।
दरअसल, यह मानवीय पहल हरीश राणा के माता-पिता के उस साहसी संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत उन्होंने अपने बेटे की मृत्यु के पश्चात उसके अंगों को दान करने का निर्णय लिया था। उनका उद्देश्य है कि भले ही उनके बेटे की जीवन यात्रा समाप्त हो रही हो, लेकिन उसके अंगों के माध्यम से कई अन्य जरूरतमंद मरीजों को मौत के मुंह से निकालकर एक नई और स्वस्थ जिंदगी दी जा सके।
एम्स में गठित विशेष मेडिकल बोर्ड की सोमवार को हुई अहम बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हरीश को अब किसी भी तरह का कृत्रिम ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया जाएगा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में यह भी तय किया गया कि उन्हें ट्यूब के माध्यम से दिया जा रहा पोषण और हाइड्रेशन भी बंद कर दिया जाए। चिकित्सा क्षेत्र में बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस फैसले के साथ हरीश राणा को सम्मानजनक और गरिमापूर्ण अंत देने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है, जिसमें सभी मेडिकल प्रोटोकॉल और दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है।