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हरीश राणा को नहीं मिल रहा ऑक्सीजन सपोर्ट, इच्छामृत्यु के लिए धीरे-धीरे अपनाई जा रही ये प्रक्रिया

Harish Rana: एम्स (AIIMS) में हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्युकी प्रक्रिया शुरू। ऑक्सीजन सपोर्ट और फीडिंग ट्यूब बंद करने का फैसला। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत डॉक्टरों की टीम कर रही है निगरानी

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Harish Rana of Ghaziabad is not getting oxygen support

Harish Rana: पिछले कई वर्षों से बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हरीश राणा के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की कानूनी प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। एम्स (AIIMS) में गठित विशेष मेडिकल कमेटी की सोमवार को हुई अहम बैठक में यह कड़ा फैसला लिया गया कि अब हरीश को किसी भी प्रकार का कृत्रिम ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया जाएगा। विशेषज्ञों की मौजूदगी में तय हुई इस प्रक्रिया के तहत, उन्हें जीवित रखने के लिए ट्यूब के जरिए दिया जा रहा पोषण और हाइड्रेशन भी अब बंद कर दिया गया है। चिकित्सा जगत में दुर्लभ माने जाने वाले इस कदम के साथ ही, हरीश राणा को गरिमापूर्ण मृत्यु देने की प्रक्रिया को धीरे-धीरे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

आपको बता दें कि चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में हरीश राणा के जीवन रक्षक उपकरणों को हटाने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम और बेहद संवेदनशील चरण में है। मंगलवार से उन्हें पोषण और हाइड्रेशन देना बंद कर दिया जाएगा, जिसके तहत उनके शरीर में लगी फीडिंग ट्यूब को हटाया तो नहीं जाएगा, लेकिन उस पर कैप लगाकर उसे पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया जाएगा। एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों की एक विशेष टीम अत्याधुनिक मॉनिटर्स के माध्यम से उनकी नब्ज और स्वास्थ्य की पल-पल की निगरानी कर रही है। 'पैसिव यूथेनेशिया' के तय मानकों के अनुसार, जीवन रक्षक प्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने की यह प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है, ताकि कानूनी और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।

गोपनीयता और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन

इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एम्स (AIIMS) अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल आधिकारिक तौर पर मौन साध रखा है और अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, सूत्रों के हवाले से खबर है कि 5 से 9 विशेषज्ञों वाली एक मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व कर रही है। यह टीम 'पैसिव यूथेनेशिया' के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित कड़े दिशा-निर्देशों और कानूनी बारीकियों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कर रही है। एम्स के शांत गलियारों में चल रही यह प्रक्रिया न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए एक चुनौतीपूर्ण अध्याय है, बल्कि यह कानूनी प्रावधानों और मानवीय संवेदनाओं के बीच एक अत्यंत जटिल और भावनात्मक संघर्ष का गवाह भी बन रही है।