नई दिल्ली

न्यायिक अधिकारी संग आपत्तिजनक हाल में दिखाई गई महिला अफसर दोषमुक्त, जिला जज ने किया बरी

Delhi Court: यह विवाद 29 नवंबर 2022 को शुरू तब हुआ, जब एक न्यायिक अधिकारी और एक महिला कोर्ट अफसर का कथित अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस अश्लील वीडियो के सर्कुलेशन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल रोक लगा दी थी।

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दिल्ली के जिला जज ने जांच में महिला अधिकारी को क्लीन चिट दी। (प्रतीकात्मक फोटो)

Delhi Court: दिल्ली की एक अदालत की महिला अधिकारी को तीन साल पुराने एक वायरल वीडियो से संबंधित न्यायिक जांच में सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। इस वीडियो में उन्हें एक न्यायिक अधिकारी के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था। लगभग तीन साल तक चली जांच के बाद, जिला जज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विभाग महिला अधिकारी पर लगे आरोपों को साबित करने में विफल रहा।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था कथित वीडियो

यह मामला तब सामने आया था जब 29 नवंबर, 2022 को एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हुआ था। इस वीडियो में कथित तौर पर एक महिला कोर्ट अधिकारी और एक न्यायिक अधिकारी को आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था। वीडियो के वायरल होने के बाद, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए इसके सर्कुलेशन पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही, इस मामले की गहन न्यायिक और विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे।

जांच में क्या सामने आया?

इस मामले की जांच कर रहे डिस्ट्रिक्ट जज ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है "विभाग यह साबित करने में नाकाम रहा कि महिला अधिकारी प्रिसाइडिंग ऑफिसर के साथ उनके चेम्बर में या कहीं और 'आपत्तिजनक स्थिति' में थीं।" रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि विभाग यह भी साबित नहीं कर पाया कि महिला अधिकारी ने अपने ऑफिस के समय के दौरान अपने प्रिसाइडिंग ऑफिसर या किसी अन्य के साथ कोई अनैतिक या यौन गतिविधि की थी।

जांच अधिकारी ने क्या कहा?

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सीसीएस (आचरण) नियम 1964 के नियम 3सी के तहत महिला पर अनुशासन भंग करने वाला कोई भी कदाचार या अनैतिक कार्य साबित नहीं होता है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि विभाग दोषी अधिकारी के खिलाफ कोई भी आरोप स्थापित करने में असफल रहा है और इसलिए जांच के बाद उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।

साल 2022 में सामने आया था आपत्तिजनक वीडियो

यह पूरा विवाद 29 नवंबर, 2022 को शुरू हुआ, जब एक न्यायिक अधिकारी और एक महिला कोर्ट अधिकारी का एक कथित अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल इस पर रोक लगा दी थी। इस घटना ने न्यायपालिका के भीतर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था, जिसके बाद न्यायिक और विभागीय जांच का आदेश दिया गया था। जांच के दौरान महिला अधिकारी को मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। हालांकि, अब इस जांच रिपोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से पूरी तरह से बरी कर दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार थे।

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