
BRICS Bazaar Delhi: एक तरफ दिल्ली में BRICS के मंच पर भारत, चीन, रूस और ईरान समेत कई देशों के प्रतिनिधि साथ नजर आए, तो दूसरी तरफ इसी आयोजन में राजनीति से अलग भारतीय संस्कृति ने भी अपनी छाप छोड़ी। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की बेटी जहरा पेजेश्कियन जब BRICS Bazaar पहुंचीं तो भारतीय कला, कारीगरी और रंग-बिरंगे हस्तशिल्प ने उनका ध्यान खींच लिया। उन्होंने अलग-अलग स्टॉल पर पहुंचकर कारीगरों का काम देखा और भारतीय कला की बारीकियों को करीब से समझने की कोशिश की। इस दौरान ईरान की पारंपरिक कढ़ाई और हस्तशिल्प भी आकर्षण का हिस्सा रहे। यानी BRICS Bazaar में देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक बातचीत के साथ-साथ संस्कृति के रंग भी खूब देखने को मिले।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी इस दौरान उनके साथ मौजूद रहीं। जहरा ने यहां अलग-अलग देशों की कला और हाथ से बनी चीजों को देखा। उन्होंने कई स्टॉल और पवेलियन का दौरा किया और वहां मौजूद कारीगरों से बातचीत भी की। BRICS Bazaar का आयोजन नई दिल्ली के नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम में किया गया है। यहां ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों की कला, कपड़े, कढ़ाई, हथकरघा और दूसरी पारंपरिक चीजें एक ही जगह पर देखने को मिल रही हैं।
इस बाजार की खास बात यह है कि यहां सिर्फ सामान नहीं रखा गया है, बल्कि हर देश की अपनी संस्कृति और पहचान भी दिखाई जा रही है। अलग-अलग देशों के कारीगर अपने हाथ का काम लेकर यहां पहुंचे हैं। इससे लोगों को एक ही जगह पर कई देशों की कला और परंपरा को करीब से देखने का मौका मिल रहा है।
BRICS Bazaar में ईरान के दो स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें ईरान की पुरानी कढ़ाई और हाथ से किए जाने वाले दूसरे काम दिखाए गए हैं। इनमें एक स्टॉल पर बलोची कढ़ाई देखने को मिल रही है। इसे नादिया करीमी ने लगाया है। यह हाथ से की जाने वाली बारीक कढ़ाई है और इसे बलूचिस्तान इलाके की महिलाओं की पुरानी कला से जोड़ा जाता है। स्थानीय भाषा में इसे 'दोच' कहा जाता है, जिसका मतलब सिलाई या सुई से किया जाने वाला काम है।
नादिया करीमी इस पुरानी कढ़ाई को नए डिजाइन के साथ जोड़कर आज के समय के हिसाब से पेश करती हैं। उन्होंने कनाडा में 'तारन' नाम से एक ब्रांड भी शुरू किया है। इसके जरिए ईरानी कला और यहां के बने सामान को दूसरे देशों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
ईरान के दूसरे स्टॉल पर आमनेह सेदिघी की ओर से रश्ती कढ़ाई और ईरान में होने वाले अलग-अलग तरह के सुई के काम को दिखाया गया है। इसमें रश्ती-दूजी के साथ शीशे का काम यानी आईनेह-दूजी भी शामिल है।
ईरान के स्टॉल की एक खास बात यह है कि यहां पुरानी कढ़ाई को सिर्फ सजाने के लिए नहीं रखा गया है। इसी काम को कपड़ों, जूतों और सैंडल जैसी रोजमर्रा इस्तेमाल की चीजों पर भी उतारा गया है।
जहरा पेजेश्कियन का BRICS Bazaar पहुंचना इस आयोजन के सांस्कृतिक पहलू को भी सामने लाता है। यहां अलग-अलग देशों की राजनीति या कारोबार की बजाय उनकी कला और कारीगरों का काम देखने को मिल रहा है।
भारत में आयोजित इस बाजार में ब्रिक्स देशों की अलग-अलग परंपराएं एक ही जगह दिखाई दे रही हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए लोगों को दूसरे देशों की संस्कृति और वहां की पुरानी कला को समझने का मौका भी मिलता है।