जयपुर. जयपुर शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से सूरजपुरा में 216 एमएलडी क्षमता का अतिरिक्त फिल्टर प्लांट बनाया गया, लेकिन 173 करोड़ रुपए की भारी लागत से तैयार यह प्लांट अपेक्षित परिणाम देने में विफल रहा है। जलदाय विभाग और बीसलपुर प्रोजेक्ट से जुड़े तीन इंजीनियरों की वर्ष 2024 में तैयार […]
जयपुर. जयपुर शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से सूरजपुरा में 216 एमएलडी क्षमता का अतिरिक्त फिल्टर प्लांट बनाया गया, लेकिन 173 करोड़ रुपए की भारी लागत से तैयार यह प्लांट अपेक्षित परिणाम देने में विफल रहा है। जलदाय विभाग और बीसलपुर प्रोजेक्ट से जुड़े तीन इंजीनियरों की वर्ष 2024 में तैयार विभागीय रिपोर्ट में सामने आया है कि डिजाइन, ड्राइंग और निर्माण में गंभीर खामियों के कारण फिल्टर प्लांट केवल 50 प्रतिशत क्षमता पर ही काम कर रहा है। इससे आगामी गर्मियों में शहर में पेयजल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
फर्म के कार्य को लेकर मिली शिकायतों के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में इंजीनियरों ने माना कि निर्माण टेंडर शर्तों के अनुरूप नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार 2.25 एमएलएच फ्लो रेट के स्थान पर मात्र 1.10 एमएलएच फ्लो रेट प्राप्त हो रही है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है और 216 एमएलडी की जगह केवल लगभग 110 एमएलडी पानी ही फिल्टर हो पा रहा है।
गर्मियों में बढ़ेगी पानी की मांग, संकट की आशंका
बीसलपुर प्रोजेक्ट और जलदाय विभाग के वरिष्ठ इंजीनियरों के अनुसार वर्तमान में जयपुर शहर को प्रतिदिन करीब 580 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जा रही है। आने वाले तीन महीनों में पृथ्वीराज नगर फेज द्वितीय से लगभग 60 एमएलडी अतिरिक्त मांग जुड़ने वाली है। इसी फिल्टर प्लांट से जल आपूर्ति प्रस्तावित है, जिससे गर्मियों में पानी के लिए हाहाकार की स्थिति बन सकती है।
ये खामियां भी आईं सामने
— बीते तीन साल में फिल्टर प्लांट को 63 दिन तक बंद रखा गया, लेकिन क्षमता में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका
— कई प्रयासों के बावजूद प्लांट की कार्यक्षमता 50 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ी।
— खामियों के कारण इसे 360 एमएलडी क्षमता तक विकसित नहीं किया जा सका।
— ट्यूब सेटलर में स्लजएक्सट्रेक्शन की व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई
— क्लेरिफायर में तय मानकों के विपरीत पीवीसी सामग्री का उपयोग किया गया।
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— सूरजपुरा में अतिरिक्त 216 एमएलडी फिल्टर प्लांट की ड्राइंग-डिजाइन व निर्माण में सामने आई तकनीकी खामियों की जांच एमएनआइटी से करा रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर फर्म पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
— शुभांशु दीक्षित, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर द्वितीय, जलदाय विभाग